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चांवल के छोटे से दाने पर बना डाली भगवान श्री राम की तस्वीर

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भगवान् श्री राम की धनुर्धारी तस्वीर चांवल के छोटे से दाने पर लिम्का एवं गोल्डन बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड पुरस्कृत मूर्तिकार अंकुश देवांगन ने बनाई है। यही नही उन्होंने इस छोटे से चांवल पर भगवान् शिवजी, श्री कृष्ण और बुद्ध जैसे चार देवताओं का चित्रण करके भी लोगों को अचंभित कर दिया है।

ज्ञात हो कि 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की स्थापना को लेकर पूरा देश पहली बार अभूतपूर्व भक्ति के वातावरण में डूबा हुआ है। इस दौर में भगवान श्रीराम की एक से बढ़कर एक विशालकाय प्रतिमाएं चारों तरफ गढ़ी जा रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य से सूक्ष्मकला के लिए मशहूर मूर्तिकार अंकुश देवांगन ने एक छोटे से चांवल के दाने पर भगवान श्रीराम की तस्वीर बनाकर मानो चमत्कार कर दिया है। जिसे देखने के लिए माइक्रो पावर लैंस की आवश्यकता पड़ती है।

ज्ञात हो कि 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की स्थापना को लेकर पूरा देश पहली बार अभूतपूर्व भक्ति के वातावरण में डूबा हुआ है। इस दौर में भगवान श्रीराम की एक से बढ़कर एक विशालकाय प्रतिमाएं चारों तरफ गढ़ी जा रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य से सूक्ष्मकला के लिए मशहूर मूर्तिकार अंकुश देवांगन ने एक छोटे से चांवल के दाने पर भगवान श्रीराम की तस्वीर बनाकर मानो चमत्कार कर दिया है। जिसे देखने के लिए माइक्रो पावर लैंस की आवश्यकता पड़ती है। अंकुश को दुनिया की सबसे छोटी मूर्तिया बनाने के लिए पहले ही लिम्का बुक ऑफ द रिकॉर्ड का पुरस्कार प्राप्त है।

अंकुश को दुनिया की सबसे छोटी मूर्तिया बनाने के लिए पहले ही लिम्का बुक ऑफ द रिकॉर्ड का पुरस्कार प्राप्त है। सरसो के दाने से भी 20 गुनी छोटी गणेश मूर्ति बनाने के कारण उन्हे यह एवार्ड मिला था। अपने सूक्ष्मकला की देश भर में 500 से ज्यादा सफल प्रदर्शनी के अलावा सात समंदर पार इंग्लैंड में भी उन्होंने भारतीय कला का परचम लहराया था। भगवान श्रीराम और उसके साथ तीन और देवताओं की तस्वीर बनाने में उन्हें लगभग तीन माह का समय लगा और इस दौरान करीब सवा सौ चांवल खराब भी हो गए। परन्तु उन्होंने हार नही मानी और अपने संकल्प को पूरा करते हुए रामलला की स्थापना से पहले इस सूक्ष्मकला को पूरा कर डाला है। अंकुश देवांगन समकालीन भारतीय कलाजगत के सशक्त हस्ताक्षर माने जाते हैं। वे सिर्फ सूक्ष्म कला ही नही बनाते हैं बल्कि बड़ी से बड़ी कलाकृतियां बनाने में भी महारत रखते हैं। दल्ली राजहरा में उन्होंने व्यर्थ पड़े लौह स्क्रेप से वेल्डिंग करके छः मंजिल इमारत जितनी विशाल कृष्ण-अर्जुन भीष्म पितामह के रथ की रचना कर डाली है। जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लौहरथ माना जाता है। भिलाई में सिविक सेंटर का भव्य कृष्ण अर्जुन रथ, सेल परिवार चौक, रूआबाधा का पंथी चौक, बोरिया गेट का प्रधानमंत्री ट्राफी चौक, सेक्टर 1 का श्रमवीर चौक या सेक्टर 8 सुनीति उद्यान की एथिक्स कलाकृतियां उनके कला के उंचाईयों को दर्शाती है। रायपुर के पुरखौती मुक्तागन, राजभवन भोपाल, सूरजकुंड हरियाणा, दुर्गापुर स्टील प्लांट जैसे देश के अनेकानेक शहरों में उनके बनाए नयनाभिराम मूर्तियां स्थापित है। वर्तमान में वे भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत हैं तथा छत्तीसगढ़ के पहले कलाकार हैं जो नई दिल्ली में ललित कला अकादमी के बोर्ड मेम्बर बने हैं।