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Big breaking :-गैरसैंण में बजट सत्र कराने के पक्ष में नहीं अधिकांश विधायक, स्पीकर को लिखा पत्र

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गैरसैंण में बजट सत्र कराने के पक्ष में नहीं अधिकांश विधायक, स्पीकर को लिखा पत्रलोकसभा चुनाव की तैयारियों के चलते धामी सरकार फरवरी में ही बजट सत्र आहूत करने की सोच रही है। लेकिन अभी तक जगह तय नहीं हुई है, उत्तराखंड विधानसभा के अधिकांश विधायक ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानमंडल भवन में बजट सत्र आहूत करने के पक्ष में नहीं हैं। करीब 7841 फीट की ऊंचाई पर स्थित भराड़ीसैंण की कंपकंपा देने वाली ठंड ने अधिकांश विधायकों के वहां जाने के इरादों को ठंडा कर दिया है। 40 से अधिक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस बार का बजट सत्र देहरादून में कराया जाए। बता दें कि विधानसभा ने ही यह संकल्प पारित कर रखा है कि बजट सत्र भराड़ीसैंण स्थित विधानमंडल भवन में ही होगा।लोकसभा चुनाव की तैयारियों के चलते धामी सरकार फरवरी में ही बजट सत्र आहूत करने की सोच रही है। हालांकि अभी सरकार ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन आधिकारिक सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक 26 फरवरी से विधानसभा के बजट सत्र की घोषणा हो सकती है। लेकिन विधानसभा सत्र कहां होगा, इस बारे में तस्वीर अभी साफ नहीं है। पिछला बजट सत्र होने के बाद गैरसैंण में फिर कोई विधानसभा सत्र नहीं हुआ। पिछले एक साल के दौरान वहां सिर्फ 15 अगस्त, राज्य स्थापना दिवस या 26 जनवरी पर हुए समारोह ने वहां पसरे सन्नाटे को तोड़ा है।गैरसैंण में सिर्फ मौसम ही नहीं सरगर्मियां भी ठंडी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बावजूद गैरसैंण से भराड़ीसैंण तक सिर्फ ठंड के सिवाय कोई सरगर्मी नहीं है। हालांकि उसके अवस्थापना विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा हुई थी। लेकिन सैकड़ों करोड़ के भव्य विधानमंडल भवन और आलीशान आवासीय परिसरों के निर्माण से आगे वहां सबकुछ ठहर सा गया है। 12 महीनों में सिर्फ चंद दिनों के लिए गर्मियों की यह राजधानी तभी गुलजार दिखती है कि जब सरकार यहां सत्र कराने पहुंचती है। सरकार के जाते ही फिर लंबा सन्नाटा पसर जाता है। भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन होते कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन सरकारें वहां कभी व्यवस्थाएं नहीं बना पाईं। इन्हीं बदइंतजामी के बहाने अब विधायकों से लेकर अफसर तक वहां जाने से परहेज कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सर्द भराड़ीसैंण में फरवरी में सत्र होगा तो ठंड का प्रकोप और भीषण हो जाएगा, जिससे दिक्कतें आएंगी।