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Big breaking :-महेंद्र भट्ट जाएंगे राज्यसभा, अनिल बलूनी जैसे विकास कार्यों को जारी रखना होगी चुनौती

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उत्तराखंड से भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट बने उम्मीदवार, जानें उनके बारे में खास बातेंउत्तराखंड की राज्यसभा सीट सांसद अनिल बलूनी के जाने के बाद खाली हुई है।राज्यसभा चुनाव में उत्तराखंड से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट उम्मीदवार होंगे।

रविवार को पार्टी हाईकमान ने उत्तराखंड समेत सात राज्यों में राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं। भट्ट का राज्यसभा जाना तय है। विधानसभा में भाजपा के पास प्रचंड बहुमत है।भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से उम्मीदवारों की घोषणा की है। उत्तराखंड से भाजपा ने कई दिग्गजों को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को उम्मीदवार घोषित किया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बदरीनाथ सीट से चुनाव हारने के बाद भी पार्टी हाईकमान ने भट्ट को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी थी।
अब उन्हें राज्य सभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया गया। 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 47 सीटें हैं। राज्यसभा चुनाव में बहुमत भाजपा के पक्ष है, जिससे भट्ट का राज्यसभा जाना तय है। बता दें कि प्रदेश से राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।27 फरवरी को होगा मतदान, शाम को मतगणना
मैं पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूं। साथ ही पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संसदीय बोर्ड का आभारी हूं। मुझे जैसे साधारण कार्यकर्ता को जो सम्मान और जिम्मेदारी दी है, उसे में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से निभाऊंगा। र्मै मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी आभार प्रकट करता हूं। आश्वस्त करता हूं कि राज्य के विकास के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करूंगा।
– महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

जानिए महेंद्र भट्ट के बारे में खास बातें
महेंद्र भट्ट वर्तमान में उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। भट्ट चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक के ब्राह्मण थाला गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने एमकॉम में उच्च शिक्षा हासिल की है। राम जन्म भूमि आंदोलन में 15 दिनों तक जेल में रहे। राज्य आंदोलन में पांच दिन में पौड़ी जेल में रहे। वर्ष 1991 से 1993 तक युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के साथ हिमाचल और महाराष्ट्र के प्रभारी भी रहे। 2005 से 2007 तक प्रदेश सचिव, 2012 से 2014 तक गढ़वाल मंडल संयोजक पद भी संभाला। 2002 में नंदप्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव जीते। 2010 से 2012 तक दर्जाधारी राज्य मंत्री रहे। 2017 से 2022 तक बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक चुने गए, लेकिन 2022 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।