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Big breaking :- होली से पहले मिलेगी खुशखबरी! केंद्रीय कर्मियों को चार फीसदी अधिक मिलेगा महंगाई भत्ता, जानें कितनी बढ़ जाएगी सैलरी

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Modi Government होली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में बढ़ोतरी कर बड़ी खुशखबरी दे सकती है. मार्च में सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते यानी डीए ((DA) में 4 प्रतिशत का इजाफा करने की संभावना है.इससे महंगाई भत्ता बढ़कर 50 फीसदी हो जाएगा. पेंशनधारकों को भी इसका लाभ मिलेगा. सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता जबकि पेंशनर्स को महंगाई राहत (DR) दी जाती है. 48.67 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 67.95 लाख पेंशनर देश में हैं. महंगाई भत्ते में साल में दो बार किया जाता है संशोधन
सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) के महंगाई भत्ते में पूरे साल में दो बार केंद्र सरकार संशोधन करती है.पहला संशोधन जनवरी और दूसरा जुलाई में की जाती है. पहली छमाही का संशोधन अधिकतर मार्च में ही सार्वजनिक किया जाता है. ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है मोदी सरकार मार्च में होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाकर उन्हें खुश कर सकती है.

साल 2023 में इतना किया था इजाफा
अक्टूबर 2023 में मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में चार फीसदी का इजाफा किया था. इसके बाद महंगाई भत्ता 42 फीसदी से बढ़कर 46 फीसदी हो गया था. इस बार संभावना व्यक्त की जा रही है कि केंद्र फिर से डीए चार फीसदी बढ़ा सकता है. मार्च में बढ़ोतरी करने पर सरकारी कर्मियों को इसका लाभ 1 जनवरी 2024 से मिलेगा. कितनी बढ़ सकती है सैलरी
केंद्र सरकार के कर्मियों के लिए डीए की गणना कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (CPI-IW) के आधार पर की जाती है. इसके लिए एक तय फॉर्मूला है.महंगाई भत्ता बढ़ने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ जाएगी. यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,00 रुपए है तो वर्तमान महंगाई भत्ता 46 फीसदी के हिसाब से 8,280 रुपए होता है. यदि सरकार डीए में चार फीसदी की बढ़ोतरी करती है तो महंगाई भत्ता 50 फीसदी हो जाएगा. इस हिसाब से सैलरी की गणना की जाए तो ये बढ़कर 9,000 रुपए हो जाएगा. इस तरह से वेतन 720 रुपए बढ़कर मिलेगा.

क्या होता है महंगाई भत्ता
महंगाई भत्ता ऐसा पैसा है जो महंगाई बढ़ने के बावजूद सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए दिया जाता है. यह पैसा सरकारी कर्मचारियों, पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों और पेंशनधारकों को दिया जाता है. इसका कैलकुलेशन देश की मौजूदा महंगाई के अनुसार हर 6 महीने पर किया जाता है. इसकी गणना संबंधित वेतनमान के आधार पर कर्मचारियों के मूल वेतन के अनुसार की जाती है. महंगाई भत्ता शहरी, अर्ध-शहरी या ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों का अलग-अलग हो सकता है. भारत में दो तरह की महंगाई होती है. एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरा थोक महंगाई है. रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है.