Home उत्तराखंड 11 सूत्री मांगों को लेकर, जोशीमठ आपदा प्रभावित ने दिया धरना

11 सूत्री मांगों को लेकर, जोशीमठ आपदा प्रभावित ने दिया धरना

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जोशीमठ (लक्ष्मण सिंह नेगी) चमोली जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के द्वारा एक दिवसीय सांकेतिक धरना तहसील परिसर जोशीमठ में दिया गया जोशीमठ नगर लगातार 2022 से भूधंसाव के कारण कई घर एवं इमारतें पर भारी भरकम दरार आने के कारण लोग आज भी अपने घरों को छोड़कर किराये की मकान में रह रहे हैं। सरकार के द्वारा आधार अधूरा राहत सहायता दी गई है कई लोगों को अभी तक उनके मकान के मुआवजा नहीं मिल पाया और भारत सरकार की लगभग 8 एजेंसियों के द्वारा जोशीमठ आपदा के संबंध में जांच पड़ताल की आज तक उनकी रिपोर्ट को सर्जरी नहीं किया गया है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती एवं प्रवक्ता कमल रतूड़ी ने ज्ञापन उप जिलाधिकारी जोशीमठ के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है उन्होंने कहा कि लगातार तीन माह तक जोशीमठ आपदा के पुनर्वास के लिए सरकार से मांग की गई इसके बाद मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद आंदोलन को स्थगित किया गया किंतु आज तक कोई भी सकारात्मक कार्यवाही नहीं हो पाई जिस पर जनता में भारी आक्रोश बना हुआ है 11 सूत्री मांग पत्र में जोशीमठ को संपूर्ण आपदा घोषित किया जाए और सभी को आपदा का लाभ दिया जाए। सभी सभी छोटे व्यापारियों को चाय और दूध बेचने वाला दैनिक मजदूरी पर्यटन पर निर्भर व्यवसायों कृषि को हुए नुकसान मुवाजा दिया जाए जोशीमठ में भारत सरकार राज्य सरकार के द्वारा 8 संस्थाओं के द्वारा किए गए अध्ययनों को शीघ्र सार्वजनिक किया जाए जिससे लोगों की आशंका ही दूर हो सके जोशीमठ के संबंध में सरकार के द्वारा चार माह पूर्व पुनर्वास के लिए घोषणा की गई थी इसका स्थाई कार्यालय जोशीमठ में शुरू किया जाए जोशीमठ में आपदा की जो भूमि आपदा में नष्ट हो गई है उसका मूल्य निर्धारण शीघ्र किया जाए आपदा के अंतर्गत होम स्टे के लोगों को व्यवसाय केटेगरी से बाहर किया जाए आपदा पीड़ितों की जो भूमि सेना के पास है उसे भूमि का शीघ्र मुवजा भुगतान किया जाए जिससे आपका पीड़ितों कोको लाभ मिल सके। जोशीमठ में कई लोग बेनाम भूमि पर काबिज है उनके नाम भूमि दर्ज की जाए इसके अलावा जोशीमठ में बाईपास रोड को पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाय। इसके अलावा वेंघर हुए परिवारों को जब तक पुनर्वास नहीं होता है तब तक वैकल्पिक व्यवस्था किया जाए। तपोवन विष्णु गाड के साथ जोशीमठ के लोगों के साथ हुए समझौते 2010 का पूर्ण से पालन किया जाए।