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स्वास्थ्य कर्मियों को त्योहार से अधिक फर्ज प्यारा

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हरीश थपलियाल

उत्तरकाशी।। बच्चे पूछते हैं मम्मी घर कब आओगी.सबके घर दिवाली की तैयारियां हो रही हैं, हम कब करेंगे। मम्मी समझा देती हैं कि ड्यूटी खत्म होते ही आ जाऊंगी। बच्चे पटाखे लाने की जिद कर पापा को घर बुलाते हैं। किसी की पत्नी कहती है कि पूजन करने भी घर नहीं आ पाओगे क्या.! अबोध बच्चों और पति के साथ दिवाली मनाने को भावुक पत्नी को कैसे समझाएं कि वक्त नाजुक है, पर्व से फर्ज बड़ा है।

दीपावली का पर्व और कोरोना ड्यूटी का फर्ज। चाहते तो वे भी परिवार के साथ दीपावली मना लेते लेकिन संकट के दौर में दिवाली से अधिक तवज्जो अपने कर्तव्य को दी। दीपावली की एक तस्वीर कोविड अस्पताल में भी है जहां दो वर्ग घर-परिवार से दूर हैं। एक वर्ग मरीज है जो अंधियारा फैलाए कोरोना की गिरफ्त में है। वहीं दूसरा वर्ग स्वास्थ्य कर्मियों का है जो उस मरीज को कोरोना की गिरफ्त से छुड़ाकर प्रकाश पथ पर लाने को तत्पर हैं।

उत्तरकाशी जिला कोविड अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जनपद के सरकारी स्वास्थ्य कर्मी मुस्तैद हैं। दीपावली के पर्व पर घर जाने की चाहत तो मन में उमड़ती है लेकिन संक्रमितों की ओर देखते ही पल भर में फर्ज की प्रधानता याद आ जाती है।

कोविड अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि हैं कि दीपावली का पर्व हर वर्ष आता है लेकिन हम चाहते हैं कि कोरोना हर वर्ष न रहे। पूरी तन्मयता के साथ ड्यूटी करेंगे जिससे अगली दिवाली सभी लोग अपने परिवार के साथ मना सकें। कोरोना अस्पताल में दिवाली मनाने के सवाल पर ड्यूटी पर तैनात डॉ दिनेश धर्मसत्तू ने कहा कि हमारे मरीज स्वस्थ होकर सकुशल घर लौटे, यही हमारे लिए उत्सव होता है।

कोविड अस्पताल में तैनात प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी कोरोना को हराने के लिए संकल्पित दिखाई दिया। ये लोग कोरोना संक्रमित मरीजों को स्वस्थ कर कोरोना संक्रमण को खत्म करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़े हैं। इनकी मेहनत कई मायनों में सफल रही है। कोरोना मुक्त विश्व ही स्वास्थ्य कर्मियों की वास्तविक दीपावली होगी।