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UCC की चर्चाओं के बीच उत्तराखंड विधानसभा में पारित हो गया एक और विधेयक, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी को आरक्षण का विधेयक पारित

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बुधवार को पूरे प्रदेश के साथ उत्तराखंड विधानसभा में यूसीसी यानि समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर इतिहास रचने की हुई, लेकिन इसके साथ उत्तराखंड विधानसभा ने इसी दिन राज्य के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राज्य आंदोलनकारियों से जुड़ा पिछले 12 वर्षों से लटका एक बड़ा काम भी कर दिया
अब उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलन कार्यों के सभी पात्र आश्रित भी राजकीय सेवा में 10% क्षैतिज आरक्षण के हकदार होंगे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलन कार्यों तथा उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण विधेयक पर गठित विधानसभा की प्रवर समिति की सिफारिश के बाद प्रस्तुत विधेयक को राज्य विधानसभा ने पास कर दिया है। आगे राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा।
उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित विधेयक के अनुसार राज्य के सभी चिन्हित राज्य आंदोलनकारी के सभी पात्र आश्रितों जिनमे चिन्हित आंदोलनकारी की पत्नी अथवा पति, पुत्र एवं पुत्री जिसमें विवाहित, विधवा, पति द्वारा परित्यक्त तलाकशुदा पुत्री भी शामिल है, तो राज्यधीन सेवाओं में 10% आरक्षण का लाभ मिलेगा।
प्रवर समिति ने ये सिफारिश भी की कि 11 अगस्त 2004 को या उसके बाद उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी शासनादेशों के अधीन विभिन्न राजकीय सेवाओं, पदों के लिए राज्य आंदोलनकारियों का चयन और नियुक्ति इस अधिनियम के तहत वैध माना जाए। जिस व्यक्ति का चिह्नीकरण सक्षम अधिकारी द्वारा राज्य आंदोलनकारी के रूप में किया गया हो, उसे प्रमाणपत्र या पहचानपत्र जारी हो। विधेयक में विभिन्न विभागों में तथा समूह घ के पदों पर सीधी भर्ती में नियुक्ति देने में आयु सीमा तथा चयन प्रक्रिया को एक बार शिथिल करने का प्रावधान के स्थान पर समिति ने राज्याधीन सेवाओं में चयन के समय चिह्नित आंदोलनकारियों या उनके आश्रितों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की सिफारिश की है।

प्रवर समिति में ये सदस्य
संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित प्रवर समिति में मुन्ना सिंह चौहान, विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ और भुवन चंद्र कापड़ी, मोहम्मद शहजाद सदस्य हैं।