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उत्तराखंडराज्य

शुक्रवार को नैनीताल जिले में सात जगहों पर जंगलों में आग की घटना

नैनीताल जिले में सात जगहों पर जंगलों में आग की घटना सामने आई। जबकि दोपहर चार बजे तक उत्तराखंड में 74.57 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुका था। वहीं गौलापार के दानीबंगर में ग्रामीणों को जुटाने के लिए वन विभाग को कठपुतली डांस का सहारा लेना पड़ा। अब राज्य में कुल आंकड़ा 1085 हेक्टेयर पहुंच चुका है।  मई के शुरुआती दिनों में भी वन विभाग को राहत मिलती नहीं दिख रही। शुक्रवार को नैनीताल जिले में सात जगहों पर जंगलों में आग की घटना सामने आई। जबकि दोपहर चार बजे तक उत्तराखंड में 74.57 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुका था।

वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डा. विनय भार्गव ने बताया कि गौना रेंज के रोखड़ क्षेत्र में सुबह आग की सूचना मिलने पर वनकर्मियों की मदद को दमकल की टीम भी पहुंच गई थी। डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में घास और झाड़िया जल गईं। डांडा रेंज के गौनियारों में आग बुझाने के लिए 28 लोगों की टीम भेज दोपहर तीन बजे तक काबू पा लिया गया। जबकि मनोरा रेंज के खुर्पाताल में ग्रामीणों का सहयोग मिलने पर स्थिति नियंत्रण में आई।

इसके अलावा ओखलकांडा के बड़ौन में पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद फायर वाचरों और ग्रामीणों ने मिलकर आग बुझाई। वहीं, रामगढ़ के सोनगांव और धानाचूली क्षेत्र में जंगल आग की चपेट में आया। वहीं, शुक्रवार को 74.57 हेक्टेयर जंगल में आग लगने के कारण अब राज्य में कुल आंकड़ा 1085 हेक्टेयर पहुंच चुका है
नुकसान हर बार की तरह कुमाऊं में ज्यादा हुआ। यहां 41.36 हेक्टेयर जंगल जला। वहीं, गौलापार के दानीबंगर में ग्रामीणों को जुटाने के लिए वन विभाग को कठपुतली डांस का सहारा लेना पड़ा। अक्सर डीजे पर बजने वाले ‘ओ मधु’ गाने की धुन पर कठपुतली डांस दिखाने के बाद भीड़ को जागरूक किया गया।

रेंजर चंदन अधिकारी ने बताया कि दानीबंगर के आसपास जंगल क्षेत्र है। लोगों को जागरूक करने के लिए कठपुतली कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। ग्रामीणों संग बड़ी संख्या में बच्चे भी यहां आए थे। जिसके बाद उन्हें जंगलों में लगने वाली आग के बचाव और रोकथाम को लेकर समझाया गया।शुक्रवार को जिला पंचायत राज अधिकारी सुरेश बेनी ने धारी ब्लाक की मनाघेर, धानाचूली, जलना, सेलालेख, रामगढ़ ब्लाक के किलौर, कूल, सुयालबाड़ी, भीमताल ब्लाक के डहरा, चोपड़ा, मंगोली और बेतालघाट विकासखंड के अमेल, भतरौज, मल्ला निगलाट, घूना, गरजौली आदि गांवों में खुली बैठक की। ग्रामीणों से घरों के आसपास सूखी पत्तियों और ज्वलनशील चीजों को हटाने के लिए कहा।

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