Udayprabhat
उत्तराखंड

हिमालय बचाओ अभियान की गोष्ठी में, परंपरागत बीज बचाने की अपील

जोशीमठ चमोली जोशीमठ के दूरस्थ क्षेत्र सलूड़ गांव में हिमालय बचाओ अभियान की एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें 60 से अधिक महिला पुरुषों ने प्रतिभाग किया इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता जनदेश के सचिव समाज सेवी लक्ष्मण सिंह नेगी ने परंपरागत बीज को बचाने की अपील की पहाड़ों में परंपरागत बीजों से प्रकृति के संरक्षण में बड़ा योगदान रहा है मोटे अनाजों की खेती पर्यावरण के अनुकूल रही है आज बदलते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से यदि खेती बच सकती है तो मोटे अनाजों की खेती ही जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए कारगर उपाय हो सकता है कम पानी में हम कैसे उत्पादन अधिक बढ़ाएं यह परंपरागत खेती में निहित है पहाड़ों में लगातार भूस्खलन बाढ़ सूखा की समस्या से निपटने के लिए हमें अपनी पारंपरिक खेती में आमूलचूल परिवर्तन करना पड़ेगा किंतु अपने बीजों को वचाने की आवश्यकता है हमारे क्षेत्र में राजमा चौलाई,मंडुवा, चीणा, धान, दाल की कई प्रजातियां थी वह धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है आज के समय में पहाड़ी अनाज का बीच बैंक बनाने की आवश्यकता है जिससे पहाड़ी बीज बच सके। इस अवसर पर देवेंद्र सिंह रावत प्रधान देवग्राम ने कहा कि हमें अपने बीजों को बचाने के लिए अभी से युद्ध स्तर पर काम करने की आवश्यकता है हमारे हाथों से हमारी खेती भी छिन्न भिन्न होने वाली है एक तरफ जंगली जानवरों के द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाया जा रहा है उसका लोगों को मुआवजा नहीं मिल पा रहा है दूसरी तरफ खेती के अनुरूप विकास योजनाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जिससे कि लोगों को अधिक उत्पादन मिल सके। बैठक में ग्राम प्रधान प्रमिला देवी सलूड़ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार जंगलों का काटना, बड़ी-बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं बनना और उससे निकलने वाला मालवा उसमें कटने वाले पेड़ पौधे और उनकी जगह पर नये पौधों का न लगाया जाना भी कारण है अन्य महिलाओं ने बताया कि लगातार अत्यधिक हाई टेंशन लाइन के बनने से भी पेड़ पौधे सूख रहे हैं उन्होंने बताया कि जहां-जहां से हमारे गांव की ऊपर से हाई टेंशन लाइन गई है उसके नीचे अधिकांश पेड़ सूख रहे हैं उन्होंने कहा कि मोबाइल नेटवर्क के टावरों के कारण भी पक्षियों की संख्या में कमी आ रही है, अत्यधिक सड़क की चौड़ीकरण के कारण काटे जाने वाले पेड़ पौधों के नुकसान से भी जलवायु में बदलाव दिख रहा है उन्होंने कहा कि हमारे गांव में आज से 20 से 25 वर्ष पूर्व 5 फीट से अधिक बर्फ गिरती थी अब मुश्किल से आधा फिट भी बर्फ पूरी जनवरी के माह में नहीं गिर रही है जिससे फसलो का उत्पादन घट रहा है कीट पतंग बढ़ गए हैं। इस अवसर पर यह भी बात सामने आयी कि हिमालय क्षेत्र में बोली भाषा रहन-सहन खानपान लोकगीत लोक संस्कृति में गिरावट निरंतर हो रही है हिमालय बचाने के संकल्प में महिलाओं ने तय किया कि हम अपने जंगलों की संरक्षण के लिए प्रयास करेंगे और यहां पर नये पौधों का रोपण करेंगे, नमी संरक्षण के लिए चाल खाल का निर्माण करगे वुगयालो में पॉलिथीन पर रोक लगाएगे बागवानी और कृषि को बढ़ावा देंगे वन अग्नि सुरक्षा के कार्यक्रम में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को जंगली जानवरों सुवरो के रोकथाम के लिए कारगर उपाय करना चाहिए। इस अवसर पर पर्वती क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति एवं स्वास्थ्य सेवाओं के बदहाली पर भी लोगों ने चिंता व्यक्ति बालिका शिक्षा के मुद्दों पर भी खुलकर लोगों ने विचार रखें। इस अवसर पर विचार रखने वालों में कलावती शाह ममता सती आदि लोगों ने विचार रखे। इस अवसर पर देव श्री देवी बीना देवी वूदा देवी, अनीता देवी रामेश्वरी देवी पूजा ललीता, मुन्नी देवी सरिता पुष्पा चंपा बिंदु उमा सहित अन्य लोग उपस्थित थे

Leave a Comment