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उत्तराखंड

शासन के आदेश पर राज्य कर्मचारी सयुक्त परिषद ने उठाए सवाल, कहा संशय की स्थिति हुई उत्पन्न

दिनांक 26.09.2023 राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष श्री अरूण पाण्डे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि परिषद के संज्ञान में लाया गया है कि वन विभाग में दैनिक वेतनभोगी, संविदा एवं आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के वेतन के भुगतान पर शासन द्वारा मानक मद 08 के स्थान पर मानक मद 27 किये जाने से संसय की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। उक्त के क्रम में परिषद के प्रदेश अध्यक्ष श्री अरूण पाण्डे एवं प्रदेश महामंत्री श्री शक्ति प्रसाद भट्ट द्वारा आज श्री आनन्द वर्द्धन, अपर मुख्य सचिव, वित्त, उत्तराखण्ड शासन से मिलकर उन्हें पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि वर्तमान में इन कर्मियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है जबकि ये कार्मिक वर्षों से वन विभाग में अपनी सेवा दे रहे हैं। प्रभावित कार्मिक अल्प वेतनभोगी कर्मी हैं अपनी उम्र के इस पडाव में यदि उन्हें सेवा से विरत किया जाता है तो न सिर्फ उनका वरन् उनके परिवार का भी भविष्य अत्यन्त कठिनाइयों से घिर जायेगा। परिषद द्वारा अपर मुख्य सचिव से वन विभाग में दैनिक वेतनभोगी, संविदा एंव आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की समस्या का समाधान करते हुए उनके भविष्य के सम्मुख उत्पन्न अनिश्चिता पर विराम लगाने हेतु शासन के स्तर से आवश्यक कार्यवाही करने हेतु अनुरोध किया गया, जिस पर अपर मुख्य सचिव महोदय द्वारा परिषद को अवगत कराया गया कि शासन द्वारा उक्त समस्या का समाधान करने हेतु समस्त विभागों से सूचना मांगी गई है। सूचना प्राप्त होते ही अवश्य ही समस्या का समाधान कर दिया जायेगा। श्री पाण्डे द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि आज ही अपर मुख्य सचिव, वित्त महोदय के सम्मुख राज्य के पेंशनधारी कार्मिकों की समस्या से अवगत कराते हुए पत्र प्रेषित किया गया कि शासन के चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग के सम्बन्धित विभाग द्वारा राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के अन्तर्गत पेंशनर्स के समस्त प्रकार के चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु आहरण वितरण का अधिकार विभागीय कार्यालयाध्यक्ष जहां से कार्मिक सेवा निवृत हुआ है, के साथ ही पेंशनर्स को पेंशन भुगतान करने वाले कोषागार के वरिष्ठ कोषाधिकारी/मुख्य कोषाधिकारी/कोषाधिकारी को नियुक्त किया गया है। किन्तु कोषागार के अधिकारियों द्वारा इस सम्बधं में पृथक से शासन के वित्त विभाग द्वारा आदेश निर्गत करने पर भी उक्त शासनादेश के अनुसार कार्यवाही करने पर तैयार हैं।

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