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उत्तराखंड: धामी सरकार का अगला कदम ‘मिशन आपातकाल’, लोकतंत्र सेनानियों को मिलेगा कानूनी हक-MISSION EMERGENCY IN UTTARAKHAND

देहरादून, उत्तराखंड: मिशन कालनेमि के बाद अब उत्तराखंड की धामी सरकार राजनीति में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है –  ‘मिशन आपातकाल’। इसके तहत सरकार एक नया विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जो 1975-77 के आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को कानूनी रूप से पेंशन और अन्य सुविधाएं देने का प्रावधान करेगा।

फिलहाल राज्य में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में एक शासनादेश के माध्यम से ऐसे लोकतंत्र सेनानियों को ₹20,000 प्रति माह पेंशन दी जा रही है। वर्तमान में उत्तराखंड में ऐसे 82 लोग हैं जो इस लाभ का फायदा उठा रहे हैं। अब धामी सरकार इस पेंशन व्यवस्था को विधायी समर्थन देने की दिशा में बढ़ रही है, ताकि इसे भविष्य में किसी भी कानूनी चुनौती से बचाया जा सके।

गृह विभाग इस विधेयक का मसौदा तैयार करने में जुटा है, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक कम से कम एक महीने जेल में रहे व्यक्ति इस कानून के दायरे में आएंगे। यह विधेयक आगामी गैरसैंण सत्र में पेश किया जा सकता है।

भाजपा नेता खजान दास ने इस कदम को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह उन लोगों को सम्मान देने की दिशा में कदम है, जिन्होंने तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका कहना है कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उसके कई नेता भी इमरजेंसी के खिलाफ थे।

हालांकि कांग्रेस ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है। कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कभी स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया और आजादी के संघर्ष में उसका कोई योगदान नहीं था।

इस विधेयक में केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन में रियायतें और अन्य लाभों पर भी विचार हो रहा है। अगर वित्त विभाग की स्वीकृति मिलती है, तो लोकतंत्र सेनानियों को मुफ्त सरकारी चिकित्सा और यात्रा की सुविधा भी मिल सकती है।

धामी सरकार इससे पहले मिशन कालनेमि, यूनिफॉर्म सिविल कोड और अवैध निर्माण हटाने जैसे फैसलों को लेकर सुर्खियों में रही है। अब ‘मिशन आपातकाल’ को लेकर भी राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

इस विधेयक के जरिए भाजपा न सिर्फ अपने पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देना चाहती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को भी घेरने की रणनीति बना रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव का कारण बन सकता है।

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