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‘बेस नहीं तो वोट नहीं’! सिमली अस्पताल के लिए 50 गांवों का शक्ति प्रदर्शन, पैदल देहरादून कूच

चमोली: सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने की मांग को लेकर चमोली जिले के ग्रामीणों ने आंदोलन तेज कर दिया है। क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों के लोग अपनी मांगों को लेकर पैदल देहरादून के लिए रवाना हो गए हैं। सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के नेतृत्व में शुरू हुई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे।

12 साल से अधूरे महिला अस्पताल को शुरू करने की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि करीब 12 साल पहले बने महिला अस्पताल को पूरी तरह संचालित किया जाए और सिमली अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा दिया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन मांग उठाने के बावजूद अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है।

इसी के विरोध में ग्रामीणों ने अब अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए देहरादून तक पैदल मार्च करने का फैसला लिया है। पदयात्रा के दौरान प्रदर्शनकारी ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे लगा रहे हैं।

सिमली से 11 अक्टूबर को शुरू हुई इस पदयात्रा में शामिल लोग रोजाना करीब 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, सोमवार शाम तक आंदोलनकारियों के रुद्रप्रयाग पहुंचने और मंगलवार को श्रीनगर में ठहरने की योजना है। इसके बाद यात्रा आगे बढ़ाते हुए देहरादून पहुंचने की तैयारी है।

पदयात्रा में शामिल ग्रामीण पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मांगों से जुड़े बैनरों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लोगों की चिंता को भी सामने ला रही है।

 

अस्पताल 12 साल पहले बना था, लेकिन अभी भी थोड़ा-बहुत चालू है. ग्रामीण अस्पताल के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. इलाके के 50 से ज्यादा गांवों के लोग जिसमें ज्यादा महिलाएं शामिल हैं, सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन में हिस्सा ले रही हैं. सभी प्रदर्शनकारी करीब 200 किलोमीटर पैदल चलेंगे और 20 अक्टूबर को देहरादून में सीएम धामी से मिलेंगे. जब तक सरकार अस्पताल को पूरी तरह चालू करने की उनकी मांग पूरी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
– देवेंद्र सिंह, संयोजक, सिमली अस्पताल संघर्ष समिति –

 

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी शासनादेश का इंतजार

संघर्ष समिति के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 नवंबर 2024 को गैरसैंण से सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने की घोषणा की थी। हालांकि, समिति का दावा है कि घोषणा के करीब दो साल बाद भी इस संबंध में शासनादेश जारी नहीं हुआ है।

समिति का कहना है कि जब तक अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास कूच की तैयारी

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति ने 20 अक्टूबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच करने का ऐलान किया है। समिति ने देहरादून में रह रहे चमोली जिले के लोगों से भी इस कार्यक्रम में शामिल होकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है।

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