देहरादून: उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को 15वें दिन भी जारी रही। लंबे समय से लंबित 27 सूत्रीय मांगों के समाधान को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब और तेज होने की ओर बढ़ रहा है। महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
महासंघ के अनुसार, मुख्यमंत्री स्तर पर उच्च अधिकारियों के साथ बैठक में समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक वार्ता के लिए कोई आमंत्रण नहीं मिला है। इसी कारण 23 मार्च से शुरू हुई हड़ताल लगातार जारी है। देहरादून शाखा के इंजीनियर्स ने लोक निर्माण विभाग परिसर में प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में भागीदारी की। सोमवार को आयोजित सभा की अध्यक्षता इंजीनियर सुजाता पाल और संचालन इंजीनियर संगीता किरोला ने किया।
इस दौरान महासंघ के पूर्व प्रांतीय महासचिव इंजीनियर मुकेश रतूड़ी के अखिल भारतीय डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन में निर्विरोध राष्ट्रीय महासचिव चुने जाने पर उनका स्वागत और अभिनंदन भी किया गया।
हड़ताल का असर अब प्रदेश के विकास कार्यों पर साफ दिखाई दे रहा है। चारधाम यात्रा से जुड़े कार्य, कुंभ से संबंधित परियोजनाएं, सौंग और जमरानी बांध, सीवर एवं डामरीकरण कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण और नहर मरम्मत कार्य भी बाधित हैं।
इसके अलावा एमडीडीए और एचआरडीए के अंतर्गत भवन मानचित्र स्वीकृति और अवैध निर्माण पर कार्रवाई जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत चल रही सड़क और पुल परियोजनाएं भी रुक गई हैं। पेयजल और सीवर कार्यों पर भी व्यापक असर पड़ा है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
महासंघ का कहना है कि गुणवत्ता से समझौता न हो, इसलिए कई स्थानों पर कार्य रुकवाए गए हैं। वहीं, कई विधायकों और विभागाध्यक्षों ने भी शासन से जल्द समाधान निकालने का अनुरोध किया है। प्रांतीय महासचिव इंजीनियर वीरेंद्र सिंह गुसाईं ने बताया कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हड़ताल में प्रांतीय अध्यक्ष आर.सी. शर्मा, उपाध्यक्ष मुकेश बहुगुणा सहित बड़ी संख्या में इंजीनियर्स शामिल रहे।
