उत्तरकाशी- हर्षिल घाटी, भारत का मिनी स्विट्जरलैंड, भी कहा जाता है. उत्तरकाशी जिले मे स्थित हर्षिल घाटी की वादियों में बनी हुई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ भागीरथी नदी के किनारे बसे हर्षिल को दी जाती हैं. जिसे भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है.
80 के दशक में बनी यह फिल्म जो 25 जुलाई 1985 को रिलीज हुई थी ये उस समय की सबसे कमाई करने वाली फिल्म बनी थी. ‘राम तेरी गंगा मैली’
फिल्म का निर्देशन राज कपूर ने किया था. इस फिल्म से राज कपूर ने मंदाकिनी को लॉन्च किया था.
राज राम तेरी गंगा मैली में राज कपूर के सबसे बड़े बेटे राजीव कपूर लीड रोल में थे. इसकी रिलीज की शुरुआत से बाद तक हंगामा मचता रहा. कुछ लोगों को फिल्म के टाइटल पर आपत्ति थी तो किसी को मंदाकिनी के बोल्ड सीन पर. तमाम विवादों से लड़ते हुए ये फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी.
उत्तरकाशी जिले में भागीरथी (गंगा) नदी के किनारे हिमालय की गगन चूमती सुदर्शन, बंदरपूंछ, सुमेरू और श्रीकंठ चोटियों की गोद में समुद्रतल से 7,860 फीट की ऊंचाई पर बसे हर्षिल को भारत का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है।
यहां की खूबसूरत वादियां, देवदार के घने जंगल, चारों फैली बेशुमार सुंदरता, रंग-विरंगे फूल, हिमाच्छादित चोटियां है पर्यटन के लिहाज से यह स्थल पहले से ही विश्व प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार ने हर्षिल और अधिक व्यवस्थित बनाया है।
चीन सीमा के निकट होने के कारण हर्षिल घाटी के आठ गांव वाइब्रेंट विलेज योजना में भी शामिल हैं। वर्ष 2016-17 में हर्षिल इनर लाइन की पबंदियों से भी मुक्त हो चुका है। इसके बाद यहां पर्यटन से जुड़े कई कार्य मास्टर प्लान के तहत हुए। हर्षिल के निकट बगोरी, धराली व मुखवा गांव में भी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
इस डाकघर में रहता था मंदाकिनी को चिट्ठी का इंतजार,
वर्ष 1984 में बनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के अधिकांश दृश्य हर्षिल व उसके आसपास के क्षेत्रों में फिल्माए गए थे। इनमें हर्षिल का वह डाकघर आज भी मौजूद है, जिसमें मंदाकिनी चिट्ठी का इंतजार करती थी। इस डाकघर से पर्यटक रूबरू हो सकें, इसके लिए प्रशासन ने ‘राम तेरी गंगा मैली’ के एक दृश्य का पोस्टर भी लगाया। हर्षिल के निकट जिस झरने में मंदाकिनी नहाई थी, उसे अब मंदाकिनी झरने के नाम से जाना जाता है।
और झरने में नहाने वाले सीन पर खूब विवाद हुआ था.
हर्षिल की सुंदरता को भी निहारें
हर्षिल में भगवान श्रीहरि का मंदिर है, जिसे श्रीलक्ष्मी-नारायण मंदिर के रूप में जाना जाता है. भारत-चीन सीमा पर तैनात सेना की हर्षिल में छावनी भी है।
मां गंगा शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा (मुखीमठ) से चार किमी की दूरी पर बगोरी गांव पड़ता है। यहां लकड़ी से बने घरों की सुंदरता देखते ही बनती है।
गांव के बीच में लाल देवता का मंदिर और बौद्ध स्मारक भी है। बगोरी के लोग पहले भारत-चीन सीमा के जादूंग व नेलांग गांव में रहते थे। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जब ये गांव खाली कराए गए तो तब यहां के ग्रामीणों ने बगोरी में नया ठिकाना बनाया। ये लोग जाड़, भोटिया और बौद्ध समुदाय के हैं।
शीतकाल के दौरान हर्षिल क्षेत्र में रात के समय तापमान शून्य से नीचे पहुंच जाता है। 15 दिसंबर से लेकर 15 मार्च तक यह क्षेत्र बर्फ की चादर ओढ़े रहता है। बर्फबारी का आनंद लेने के लिए इस दौरान सबसे अधिक पर्यटक पहुंचते हैं.
हर्षिल पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से ऋषिकेश से चंबा होते हुए उत्तरकाशी तक 160 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। देहरादून से सुवाखोली होते हुए यह दूरी 140 किमी है। उत्तरकाशी से हर्षिल 75 किमी की दूर पर स्थित है। यह गांव सड़क से जुड़ा हुआ है।
