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पंचायत चुनाव में शराब के खिलाफ आबकारी विभाग का शिकंजा, शराब नहीं परोस पाएंगे प्रत्याशी, 30 मामलों में कार्रवाई

हल्द्वानी: उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया जोर पकड़ चुकी है। कई प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए हरसंभव हथकंडे अपना रहे हैं, जिसमें धनबल और शराब का दुरुपयोग भी शामिल है। इसे रोकने के लिए निर्वाचन विभाग ने विभिन्न स्तरों पर टीमें गठित की हैं, वहीं आबकारी विभाग ने भी प्रदेश भर में विशेष अभियान शुरू किया है।

शराब के प्रलोभन पर रोक लगाने के उद्देश्य से आबकारी विभाग ने सभी जिलों में विशेष टास्क फोर्स टीम गठित की है। संयुक्त आबकारी आयुक्त, कुमाऊं मंडल के.के. कांडपाल ने बताया कि शासन के निर्देश पर पंचायत चुनाव में शराब के भंडारण और आपूर्ति को रोकने के लिए जिला आबकारी अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में विभाग में भर्ती हुए 90 नवनियुक्त आबकारी सिपाहियों को इन टीमों में शामिल किया गया है। ये टीमें न सिर्फ राज्य की सीमाओं पर बल्कि बाहरी स्रोतों से आने वाली अवैध शराब पर भी कार्रवाई कर रही हैं। इसके साथ ही प्रवर्तन टीम भी लगातार सक्रिय है।

हालांकि अब तक किसी बड़े शराब तस्करी के मामले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। जहां भी शराब बांटने की शिकायत मिल रही है, वहां विभागीय टीम तत्काल पहुंचकर कार्रवाई कर रही है।

नैनीताल जिले में अब तक की कार्रवाई:

आचार संहिता लागू होने के बाद जिले में कुल 30 मामलों में कार्रवाई की गई है। इसमें 120 बोतल देसी शराब, 496 लीटर कच्ची शराब और 17,000 लीटर लहन बरामद किया गया है। शासन और निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत यह अभियान पंचायत चुनाव संपन्न होने तक जारी रहेगा।

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