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टिहरी बांध पुनर्वास घोटाला, एक भूखंड, दो आवंटन! DM ने भेजी जांच की संस्तुति, दोषियों पर होगी कार्रवाई

देहरादून: देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल के जनता दर्शन कार्यक्रम में टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों को आवासीय भूखंड आवंटन में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। पुलमा देवी मामले के बाद से ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने सचिव सिंचाई विभाग को विस्तृत जांच की संस्तुति भेजी है। प्रशासन अब भूमि फ्रॉड में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी में है।

जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई संस्तुति में कहा गया है कि टिहरी बांध पुनर्वास विभाग द्वारा वर्षों से किए जा रहे आवंटन में भारी गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं। कई मामलों में एक ही भूखंड को दो बार आवंटित किया गया, जिससे भूमि विवाद और धोखाधड़ी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

पुलमा देवी, निवासी शास्त्रीपुरम, रायपुर द्वारा दर्ज शिकायत में उल्लेख है कि उन्होंने वर्ष 2007 में दिनेश रावत से भूमि क्रय की थी, जो उनके नाम पर दर्ज भी हो गई। लेकिन बाद में एक अन्य महिला ने जबरन उस भूमि पर कब्जा कर लिया। जांच में यह सामने आया कि जिस भूखंड का आवंटन पुलमा देवी को हुआ था, वही भूखंड पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को दिया जा चुका था। यह दोहरा आवंटन वर्ष 2019 में पुनः दर्ज हुआ, जिसे बाद में निरस्त किया गया।

इसी प्रकार, सुमेर चंद और शैलेन्द्र कुमार द्वारा ग्राम अटकफार्म में भूखंड संख्या 28 व 29 पर कब्जा न मिलने की शिकायत दर्ज की गई। जांच में पाया गया कि उक्त भूमि पर पहले से ही कुन्दन लाल जोशी का कब्जा है, जबकि आवंटी परिवारों को उनकी स्वीकृत भूमि अब तक नहीं मिल सकी।

एक अन्य शिकायत दिल्ली निवासी अजय चौहान द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें अजबपुर कलां में भूखंड संख्या B-205 को पहले इरशाद अहमद को और बाद में फतरू को आवंटित किया गया। विभाग द्वारा बाद में दूसरा आवंटन निरस्त किया गया।

जिलाधिकारी ने इन गंभीर प्रकरणों पर चिंता जताते हुए कहा कि सभी विवादित आवंटनों की गहन जांच विशेष एजेंसी या पुलिस जांच दल से कराई जानी चाहिए, ताकि दोषियों को दंडित कर विस्थापितों को न्याय मिल सके। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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