टॉस और पर्ची से तय हुई प्रधान की किस्मत, बराबरी के वोट के बाद टॉस-पर्ची बनी जीत की कुंजी, नितिन और लक्ष्मी देवी को मिली प्रधान की कुर्सी.
चमोली: उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 में चौंकाने वाले और दिलचस्प नतीजे सामने आने लगे हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में ग्राम प्रधान पद की जंग इतनी कड़ी रही कि नतीजे टॉस और पर्ची के जरिए तय किए गए।
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के परिणाम धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के साथ ही कई सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन चमोली और रुद्रप्रयाग से आए परिणामों ने लोकतंत्र की अनूठी तस्वीर पेश की। यहां ग्राम प्रधान पद की दौड़ में प्रत्याशियों को समान वोट मिले, जिससे चुनाव आयोग को निर्णय के लिए टॉस और पर्ची का सहारा लेना पड़ा।
चमोली में टॉस से तय हुआ प्रधान
चमोली जिले के दसोली ब्लॉक अंतर्गत बणद्वारा गांव में ग्राम प्रधान पद के लिए दो युवाओं, नितिन नेगी और रविंद्र, के बीच जबरदस्त मुकाबला हुआ। मतगणना के अंतिम चरण तक दोनों को बराबर 138-138 वोट मिले। ऐसी स्थिति में निर्वाचन नियमों के अनुसार, निर्णय के लिए टॉस किया गया। टॉस में 23 वर्षीय नितिन नेगी विजयी घोषित किए गए। इस अनोखी जीत के बाद नितिन ने कहा कि यह जनता का विश्वास और किस्मत का मेल है, जो उन्हें ग्राम प्रधान पद तक लेकर आया है।
रुद्रप्रयाग में पर्ची ने बनाया विजेता
इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक स्थित कांदी गांव में ग्राम प्रधान पद की जंग लक्ष्मी देवी और पूनम देवी के बीच बराबरी पर छूटी। दोनों को 168-168 वोट मिले। यहां निर्णय के लिए निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में पर्ची निकालने की प्रक्रिया अपनाई गई। जिलाधिकारी प्रतीक जैन की उपस्थिति में निकाली गई पर्ची में लक्ष्मी देवी का नाम निकला और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया। लक्ष्मी देवी ने आइसक्रीम चुनाव चिन्ह से चुनाव लड़ा था।
लोकतंत्र में रोमांच और नियमों का पालन
दोनों घटनाएं दर्शाती हैं कि ग्रामीण स्तर के लोकतंत्र में भी पारदर्शिता और नियमों का पालन किस हद तक होता है। जब वोट बराबरी पर हों और कोई स्पष्ट विजेता न हो, तो राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार टॉस या पर्ची जैसे पारंपरिक माध्यमों से निर्णय लिया जा सकता है। यह प्रक्रिया भले ही साधारण दिखे, लेकिन इसमें भी निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।
इन दोनों उदाहरणों ने पंचायत चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। जहां एक ओर युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाएं भी बराबरी से लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ रही हैं।
