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प्रधानमंत्री मोदी ने किया कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन, जानें क्या है कर्तव्य भवन की खासियत?- KARTAVYA BHAWAN

अक्टूबर 2026 तक तैयार होंगे सभी प्रस्तावित कर्तव्य भवन
किराए के भवनों पर खर्च होने वाले 1500 करोड़ रुपये की होगी बचत
आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल सुविधाओं से लैस होगा नया कॉम्प्लेक्स
पुराने मंत्रालय भवनों की जगह बनेगा भारत संग्रहालय.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 6 अगस्त को कर्तव्य पथ स्थित नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया। यह भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत निर्मित उन 10 अत्याधुनिक कार्यालय परिसरों में से पहला है, जिनमें केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालयों और विभागों को स्थानांतरित किया जाना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये नए भवन “न्यू इंडिया” की कार्यसंस्कृति का प्रतीक बनेंगे, जहां दक्षता, नवाचार और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। कर्तव्य भवन-3 में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, डीओपीटी और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय स्थानांतरित किया जाएगा।

अक्टूबर 2026 तक सभी भवन होंगे तैयार

शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जानकारी दी कि कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 भी अगले महीने तक बनकर तैयार हो जाएंगे। साथ ही अन्य सभी भवनों का निर्माण कार्य अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पूरी परियोजना पर लगभग 1000 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है।

पर्यावरण के अनुकूल निर्माण

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला यह भवन दो बेसमेंट और सात मंजिलों (भूतल सहित) का है। इसमें स्मार्ट एंट्री सिस्टम, कमांड सीसीटीवी सेंटर, सोलर पैनल, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन, सौर वॉटर हीटर और कांच की विशेष खिड़कियों जैसी सुविधाएं हैं। ऊर्जा की बचत के लिए इसमें स्मार्ट लाइटिंग, एलईडी बल्ब, सेंसर और स्मार्ट लिफ्ट्स लगाई गई हैं। भवन को 30% तक कम ऊर्जा खपत के लक्ष्य के साथ डिज़ाइन किया गया है।

नॉर्थ-साउथ ब्लॉक में बनेगा भारत संग्रहालय

मंत्री खट्टर ने बताया कि मौजूदा नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में स्थित मंत्रालयों को स्थानांतरित कर वहां ‘भारत संग्रहालय’ बनाया जाएगा, जिसमें देश के इतिहास, संस्कृति और सभ्यता को दर्शाया जाएगा। मौजूदा शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी इमारतें 1950-70 के दशक में बनी थीं, जिनका रखरखाव अब खर्चीला हो गया है।

इंद्रप्रस्थ मेट्रो से जुड़ेगा नया कॉम्प्लेक्स

नए कर्तव्य भवनों को दिल्ली मेट्रो की इंद्रप्रस्थ लाइन से जोड़ने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है, जिससे कर्मचारियों और आगंतुकों को आसानी हो सके। फिलहाल, जिन मंत्रालयों के भवन तैयार नहीं हुए हैं, उन्हें अस्थायी रूप से किराये के भवनों में शिफ्ट किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे ये भवन न सिर्फ कार्यक्षमता को बढ़ाएंगे बल्कि भारत की आधुनिक प्रशासनिक सोच को भी दर्शाएंगे।

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