हैदराबाद: भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवनंदन ने ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप 2025 में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो अब तक किसी ने इतनी कम उम्र में नहीं किया था। महज 10 साल, 5 महीने और 3 दिन की उम्र में उन्होंने 60 वर्षीय ग्रैंडमास्टर पीटर वेल्स को आखिरी दौर में मात देकर इतिहास रच दिया। यह मुकाबला लिवरपूल में खेला गया था और जीत के साथ बोधना का नाम दुनिया के शतरंज इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।
अमेरिकी खिलाड़ी का टूटा रिकॉर्ड
इस ऐतिहासिक जीत के साथ बोधना ने अमेरिकी खिलाड़ी कैरिसा यिप का रिकॉर्ड तोड़ दिया। कैरिसा ने 2019 में 10 साल, 11 महीने और 20 दिन की उम्र में ग्रैंडमास्टर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की थी। बोधना की यह उपलब्धि न सिर्फ ब्रिटिश शतरंज जगत के लिए बल्कि भारतीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय बन गई है।
YouTube से सीखा खेल, घर के गैरेज से मिली प्रेरणा
बोधना की शतरंज यात्रा बेहद दिलचस्प है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब उनकी उम्र सिर्फ 5 साल थी, उनके पिता के एक दोस्त अपने गैरेज में पड़ा शतरंज सेट फेंकने वाले थे। लेकिन तमिलनाडु में जन्मे उनके पिता शिवा ने इसे फेंकने की बजाय घर ले आए। मोहरों की चाल और खेल की बारीकियां बोधना को इतनी भाईं कि उन्होंने YouTube वीडियो देखकर और ऑनलाइन अजनबियों के साथ खेलते हुए खुद को निखारना शुरू कर दिया।
दिग्गजों की भी मिली सराहना
बोधना की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शतरंज की दिग्गज खिलाड़ी सुसान पोल्गर ने भी खुशी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “बोधना शिवनंदन सिर्फ 10 साल, 5 महीने और 3 दिन की उम्र में ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की लड़की बन गईं।
तमिलनाडु से लंदन तक का सफर
बोधना के माता-पिता का संबंध तमिलनाडु के त्रिची से है। 2007 में उनका परिवार लंदन चला गया, जहां बोधना का जन्म और पालन-पोषण हुआ। आईटी प्रोफेशनल पिता के मार्गदर्शन और अपने जुनून के दम पर बोधना आज ब्रिटिश शतरंज में एक मजबूत दावेदार बन चुकी हैं। आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़े रिकॉर्ड की उम्मीद की जा रही है।

