जमीन के विवाद ने छीनी जान, भतीजे ने चाचा की हत्या कर रचा आत्महत्या का नाटक, पोस्टमार्टम ने खोला पूरा राज
हरिद्वार: रिश्तों की मर्यादाएं उस समय चकनाचूर हो गईं जब धारीवाला गांव में एक भतीजे ने अपने ही चाचा की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। जमीनी विवाद और घरेलू कलह इस हद तक बढ़ गई कि 24 वर्षीय सुनील ने 42 वर्षीय सुरेश की जान ले ली। परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगी, लेकिन पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस पूरे मामले का सच सामने ला दिया।
घटना दो दिसंबर की सुबह सामने आई, जब ग्राम धारीवाला में सुरेश नामक ग्रामीण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना डायल 112 पर मिली। सूचना पर पथरी थाना प्रभारी मनोज नौटियाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सुरेश का शव घर के कमरे में खाट पर पड़ा था, जबकि परिजन इसे फांसी लगाकर आत्महत्या बताने की कोशिश कर रहे थे। परिवार का कहना था कि सुरेश ने चुन्नी से फांसी लगाई और भतीजे सुनील ने शव को नीचे उतारकर खाट पर लिटा दिया। लेकिन पुलिस की नजर मृतक के गले पर पड़े गहरे निशानों पर गई, जो किसी भी आत्महत्या के मामले से मेल नहीं खा रहे थे।

शक गहराया तो पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाकर जांच कराई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। चूंकि मृतक अविवाहित था और परिवार ने कोई तहरीर देने से इनकार कर दिया, पुलिस ने स्वयं ही हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। पूछताछ शुरू हुई तो पुलिस का शक सुनील पर टिक गया, जो सबसे पहले मौके पर पहुंचा था और सबसे ज्यादा रो-रोकर आत्महत्या की कहानी दोहरा रहा था। सुरेश और सुनील के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि सुरेश शराब के नशे में आए दिन सुनील को गाली देता था, जिससे सुनील के मन में उसके प्रति गहरी नाराजगी पनप चुकी थी।
सख्ती से पूछताछ किए जाने पर सुनील आखिरकार टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि घटना वाले दिन दोनों में कहासुनी हुई और गुस्से में उसने चुन्नी से चाचा का गला दबा दिया। हत्या करने के बाद वह घबरा गया और मामले को आत्महत्या दिखाने का प्रयास किया। उसने मृतक के गले में वही चुन्नी बांधकर टीनशेड के एंगल से लटकाने की कोशिश की, लेकिन शव भारी होने के कारण नीचे गिर गया। मजबूरन उसने शव को खाट पर लिटाया और अगली सुबह परिवार को सूचना दी कि सुरेश ने फांसी लगा ली है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी पुष्टि कर दी कि सुरेश की मौत दम घुटने से हुई थी और निशान किसी हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने सुनील को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। हत्या का खुलासा करने में थानाध्यक्ष मनोज नौटियाल, एसएसआई यशवीर सिंह नेगी, दरोगा विपिन कुमार, महेंद्र पुंडीर, उपनिरीक्षक मुकेश राणा और सिपाही मुकेश चौहान, जयपाल चौहान, अनिल सिंह तथा कान्तिराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
