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संसद में उठा साइबर अपराध का मुद्दा, केंद्र ने मजबूत किया सुरक्षा तंत्र, 8,690 करोड़ रुपये की ठगी रोकी 

नई दिल्ली: देश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर संसद में गंभीर चर्चा हुई, जहां अजय भट्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से पिछले तीन वर्षों के साइबर अपराधों का ब्यौरा और उनसे निपटने के उपायों पर सवाल उठाया। इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बताया कि सरकार साइबर अपराधों से निपटने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।

सरकार के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

केंद्र सरकार ने साइबर अपराध नियंत्रण के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है, जो देशभर में इस प्रकार के अपराधों से समन्वित तरीके से निपटने का कार्य करता है। आम नागरिकों की सहायता के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए “नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली” लागू की गई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में 8,690 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को बचाया गया है। साथ ही, तत्काल सहायता के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी लागू की है, जिससे शिकायतों के निपटान को और अधिक प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित बनाया जा सके।

साइबर जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा “मन की बात”, कॉलर ट्यून, सोशल मीडिया अभियान, टीवी-रेडियो कार्यक्रम और स्कूल स्तर तक विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक के इस दौर में नागरिक सुरक्षित रहें और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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