पार्थिव शरीर देख बेसुध हुई पत्नी, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, पूरे गांव ने नम आंखों से दी विदाई
पिथौरागढ़: सिक्किम में हुए हिमस्खलन (एवलॉन्च) में सर्वोच्च बलिदान देने वाले पिथौरागढ़ के वीर जवान विकास कुमार शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पैतृक गांव गणकोट (सुकौली) में अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और माहौल गमगीन हो गया।
पार्थिव शरीर पहुंचते ही मचा कोहराम
सेना की गाड़ी जैसे ही शहीद विकास कुमार का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। हर आंख नम थी और हर चेहरा अपने वीर सपूत को खोने के दुख में डूबा नजर आया।
पति को देख बदहवाश हुई पत्नी
जब ताबूत खोला गया और पत्नी प्रीति ने अपने पति का चेहरा देखा तो वह खुद को संभाल नहीं पाईं। वे बेसुध होकर बार-बार कहने लगीं कि “इन्हें अस्पताल ले चलो…”। मौके पर मौजूद लोगों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

“मेरे भाई ने बचपन से ही देश के लिए जीने का सपना देखा था. वो सेना में भर्ती हुआ और देश के लिए कुर्बान हो गया. मेरी मांग है कि गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखा जाए और एक गेट भी उनके नाम से बनाया जाए. ताकि, इतिहास के पन्नों पर उनका नाम दर्ज रहे.“- नीरज, जवान के बड़े भाई
रोते-बिलखते परिजनों ने किए अंतिम दर्शन
परिवार के सदस्यों ने रोते-बिलखते हुए अपने लाडले को अंतिम विदाई दी। गांव में एक ओर शोक का माहौल था तो दूसरी ओर अपने बेटे के बलिदान पर गर्व भी झलक रहा था। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

रामेश्वर घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
शहीद की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, विकास तेरा नाम रहेगा” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। रामेश्वर घाट पर उनके बड़े भाई नीरज ने मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

बेटे के जन्मदिन पर घर आने वाले थे विकास कुमार
विकास कुमार वर्ष 2023 में विवाह बंधन में बंधे थे। 4 जून 2025 को उनके घर बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम पृथ्विक रखा गया। वे बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद खबर आ गई। परिवार उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, जो अब कभी पूरा नहीं होगा।

शहीद विकास कुमार का बलिदान देश की सेवा और सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक है. उनका यह सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा. इस दुख की घड़ी में पूरा प्रशासन उनके साथ खड़ा है.“- आशीष कुमार भटगांई, जिलाधिकारी, पिथौरागढ़
साल 2017 में हुए थे भर्ती: गौर हो कि पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के पास स्थित गणकोट गांव के 27 वर्षीय विकास कुमार 19 कुमाऊं रेजिमेंट में लांस नायक के पद पर तैनात थे. जो 29 मार्च को सिक्सिम में गश्त के दौरान वे अपने दो साथियों के साथ हिमस्खलन की चपेट में आ गए. इस हादसे में उनके दोनों साथी सुरक्षित बच गए. जबकि, अपने कर्तव्य पालन के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए. विकास साल 2017 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे.
