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रुद्रपुर में किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी, राजनीतिक मंच बनाने से किया इनकार

रुद्रपुर: ऊधम सिंह नगर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के बाहर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। किसानों ने भोजन, चाय-नाश्ते और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का इंतजाम स्वयं किया है।

किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और किसी भी राजनीतिक दल को इसका मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी दौरान किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को समर्थन दिया। हालांकि मंच साझा करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद तीनों नेता कुछ देर किसानों के बीच बैठने के बाद वापस लौट गए।

धरने को देखते हुए कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मुख्य गेट के पास पुलिस बल तैनात रहा और एसडीएम सदर भी मौके पर मौजूद रहे। किसानों के अनुसार प्रशासन की ओर से धरना स्थल पर पानी और बिजली की व्यवस्था की गई है, जबकि टेंट, भोजन और अन्य इंतजाम किसान स्वयं कर रहे हैं।

किसान नेता बाजवा ने कहा कि किसान अपने आंदोलन को किसी भी तरह का राजनीतिक रंग नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगों के लिए खुद संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें किसी राजनीतिक दल के सहारे की जरूरत नहीं है।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों ने ट्यूबवेल के बिजली बिल माफ करने, घरेलू कनेक्शन पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने और किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही पहाड़ी जिलों के किसानों को प्रतिमाह 20 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की मांग भी शामिल है।

किसानों ने बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि पर लगी रोक हटाने और किसानों को भूमि पर पूर्ण अधिकार देने की मांग की है। इसके अलावा वर्ष 2007 के गन्ना भुगतान के करीब एक करोड़ रुपये तथा वर्ष 2011-12 के करीब 25 करोड़ रुपये के बकाये का तत्काल भुगतान करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने, पहले से लगाए गए स्मार्ट मीटर हटाने, गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 700 रुपये प्रति क्विंटल करने और किसानों की विभिन्न श्रेणियों की भूमि पर हक-कब्जा देने जैसी मांगें भी रखी गई हैं।

किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा।

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