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हरिद्वार मेडिकल कॉलेज का सरकार ने भरा 10 करोड़ का बिल, 287 डॉक्टरों की नियुक्ति की तैयारी

हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के साथ जल्द खुलेगा अस्पताल, इमरजेंसी को छोड़कर 80 प्रतिशत बेड पर हरिद्वार और आसपास के लोगों को प्राथमिकता मिलेगी

हरिद्वार: लंबे समय से विवादों में घिरा हरिद्वार का राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। कॉलेज का 10 करोड़ रुपये का बिजली बकाया भुगतान कर दिया गया है, जिसके बाद छात्रों को अब निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल रही है। स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने पुष्टि की कि सरकार ने विद्युत विभाग का पूरा बकाया जमा कर दिया है और समस्याओं का समाधान कर दिया गया है।

बिजली कटने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित

नवंबर की शुरुआत में बिजली बिल जमा न होने के कारण मेडिकल कॉलेज की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी। इससे कॉलेज में पढ़ रहे एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई और उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया। छात्रों ने लगातार धरना देकर कॉलेज प्रशासन और सरकार का ध्यान इस ओर खींचा।

बिल्डिंग का 20% कार्य अभी बाकी

स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत के अनुसार, मेडिकल कॉलेज का लगभग 20 प्रतिशत निर्माण कार्य अभी शेष है। सरकार ने कॉलेज को जल्द शुरू करने का निर्णय इसलिए लिया ताकि अगले वर्ष तक इसके साथ संचालित होने वाला अस्पताल भी शुरू किया जा सके।

कनेक्शन अब कॉलेज के नाम पर

मंत्री रावत ने बताया कि पहले बिजली कनेक्शन कार्यदायी संस्था के नाम पर था, लेकिन अब इसे मेडिकल कॉलेज के नाम पर कर दिया गया है। इसी बदलाव की प्रक्रिया के दौरान कुछ समय के लिए बिजली की समस्या बनी रही, जिसे अब पूरी तरह दूर कर दिया गया है।

राज्य में 287 डॉक्टरों की नियुक्ति जल्द

धन सिंह रावत ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 287 डॉक्टरों के पदों का अधियाचन भेज दिया है। नियुक्तियों के बाद मेडिकल कॉलेज और राज्य के अस्पतालों में सुविधाओं में बड़ा सुधार आएगा।

200 छात्र कर रहे हैं एमबीबीएस की पढ़ाई

हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटें हैं। वर्तमान में यहाँ 2024 और 2025 बैच के कुल 200 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में निजीकरण और बिजली कटौती जैसे मुद्दों को लेकर दोनों बैच के छात्र विरोध कर चुके हैं।

मंत्री रावत के अनुसार अगले पाँच महीनों में मेडिकल कॉलेज का अस्पताल शुरू कर दिया जाएगा। अस्पताल में 80 प्रतिशत बेड हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराए जाएंगे। अस्पताल शुरू होने पर रेफर किए जाने वाले मामलों में कमी आएगी और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

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