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गोल्डन कार्ड से नहीं मिलता इलाज, कार्मिकों की दिक्कतों पर सरकार मौन: मोर्चा

इलाज नहीं, परेशानी दे रहा गोल्डन कार्ड, स्वास्थ्य मंत्री की उदासीनता पर मोर्चा आक्रामक
विवेक वर्मा

विकासनगर: प्रदेश के सरकारी कार्मिकों को गोल्डन कार्ड योजना के तहत कैशलेस उपचार की सुविधा देने का दावा करने वाली सरकार लगातार सवालों के घेरे में है। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि प्रदेश में कार्मिक गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अधिकांश अस्पतालों में कैशलेस सुविधा बंद पड़ी है, जिसके चलते कार्मिकों के परिजनों को इलाज शुरू करने से पहले धन की व्यवस्था के लिए परेशान होना पड़ता है।

नेगी ने कहा कि कई बार पैसों की व्यवस्था करते-करते मरीज की जान पर बन आती है। यदि किसी तरह उपचार शुरू भी हो जाए, तो भुगतान किए गए बिलों की प्रतिपूर्ति कराने में कई—कई महीने लग जाते हैं। यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल होने के कारण कार्मिकों को भारी मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री अपने संसाधन मजबूत करने में लगे हैं, लेकिन कार्मिकों की समस्याओं से बेखबर बने हुए हैं। मोर्चा ने मांग की कि हर सूचीबद्ध अस्पताल में गोल्डन कार्ड से निर्बाध कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा धन की कमी को सुविधा में बाधक न बनने दिया जाए।

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