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तीन साल से जंगलों में सड़ रहे करोड़ों के स्लीपर, फाइलों में उलझा सिस्टम

पुरोला के टौंस लॉगिंग प्रभाग में देवदार-फर की बहुमूल्य लकड़ी बारिश-धूप में बर्बाद, मजदूरों का भुगतान भी अटका

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जिले के पुरोला स्थित टौंस लॉगिंग प्रभाग में करोड़ों रुपये की बहुमूल्य वन सम्पदा पिछले तीन वर्षों से खुले आसमान के नीचे पड़ी सड़ने की कगार पर पहुंच गई है। हजारों घन मीटर में तैयार स्लीपर (प्रकाष्ठ), जिन्हें सुरक्षित डिपो में रखा जाना चाहिए था, वे बारिश में भीग रहे हैं और धूप में फट रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 और 2023 में पेड़ों के अवैध पातन से जुड़े मामलों का निस्तारण न होने के कारण यह स्थिति बनी। वन विभाग और वन विकास निगम के बीच तालमेल की कमी के चलते फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं और तैयार लकड़ी जमीन पर ही पड़ी रह गई। इस लकड़ी पर पहले ही कटान, चिरान, ढुलाई और संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

सूत्रों का कहना है कि मामले में उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई है, लेकिन इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि जांच पूरी होने से पहले ही लकड़ी पूरी तरह खराब हो सकती है। आने वाला मानसून इस नुकसान को और बढ़ा सकता है।

इस पूरे मामले का असर केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं है। स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों का भुगतान भी पिछले तीन वर्षों से अटका हुआ है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। हाल ही में उन्होंने वन मंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी, जहां उन्हें आश्वासन दिया गया।

वहीं, उस समय तैनात रहे कई कर्मचारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन मामला लंबित होने के कारण उनकी पेंशन भी अटकी हुई है। संबंधित अधिकारी डीएफओ डीपी बलूनी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन बंद मिला।

यदि जल्द ही अवैध पातन के मामलों का निस्तारण कर स्लीपर को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया और जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो यह मामला करोड़ों रुपये के नुकसान के साथ एक और प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बन जाएगा।

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