देहरादून: देहरादून में फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिले के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या आठ पहुंच गई है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
पांच साल से चल रहा था एडमिशन कंसल्टेंसी का काम
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मामले में पहले गिरफ्तार किया गया आरोपी रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। बताया जा रहा है कि मेरठ में मेकोडो पाठशाला नाम से संचालित कंपनी के माध्यम से विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों के शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले करवाए जाते थे। इनमें MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom जैसे पाठ्यक्रम शामिल थे।
बेटियों के दाखिले के लिए बनवाए गए कथित फर्जी प्रमाण पत्र
SIT के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने अपनी बेटियों को मेडिकल की पढ़ाई में दाखिला दिलाने के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। आरोप है कि इसके लिए आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र समेत कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार करवाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि इन दस्तावेजों के आधार पर एक अभ्यर्थी को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाया गया, जबकि दूसरी अभ्यर्थी को NEET काउंसलिंग में शामिल कराया गया था।
पुलिस के अनुसार, दस्तावेज तैयार करवाने के बदले एक आरोपी ने कथित तौर पर 25 लाख रुपये और दूसरे ने 30 लाख रुपये रूपेश पंडित को दिए थे। मामले में एक अन्य आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपनी बेटी के MBBS दाखिले के लिए परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर कथित फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाने की बात बताई।
आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर हरिद्वार स्थित जीएमसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया।
दो थानों में दर्ज हैं मुकदमे
पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर 2026 को रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने के संबंध में मुकदमे दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए।
