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जल जीवन मिशन: आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण को लेकर उत्तरांचल प्रेस क्लब में उठी आवाज

देहरादून:  प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में जल जीवन मिशन निदेशालय में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ हो रहे शोषण और भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ तीव्र आक्रोश व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आउटसोर्स कंपनी पी.ई.जे.के.एस. के माध्यम से कार्यरत उत्तराखंड के युवाओं को अनुचित रूप से हटाया गया, जबकि उनकी जगह नए लोगों को नियुक्त किया गया है, वह भी तब जब शासन ने नई नियुक्तियों पर रोक लगाई हुई है.

प्रवक्ताओं ने इसे सुनियोजित भ्रष्टाचार और भेदभाव की संज्ञा दी, जिसमें कुछ अधिकारियों और आउटसोर्स एजेंसी की मिलीभगत से युवाओं को हटाया गया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कई कर्मचारियों से पीएफ और ईएसआई के नाम पर पैसे काटे गए, लेकिन उनका जमा नहीं किया गया। एक महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन नहीं मिला और ‘चाय-पानी’ के नाम पर फाइल पास कराने के लिए घूस मांगी गई।
उत्तराखंड रक्षा अभियान के संयोजक ब्रह्मचारी हरिकिशन किमोठी और किसान यूनियन एकता शक्ति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दत्त शर्मा ने दोषी अधिकारियों को हटाने, उनके खिलाफ जांच कराने और प्रतिनियुक्ति समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन को उत्तराखंड के लोगों की सेवा के लिए चलाया जा रहा है, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।

वक्ताओं ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि विभाग में ‘गढ़वाल-कुमाऊं वाद’ और ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ जैसी खतरनाक मानसिकता पनप रही है, जो राज्य की भावना को आहत करती है। चेतावनी दी गई कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जनआंदोलन चलाया जाएगा। ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने की भी मांग की गई।

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