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नशा निरोधक दिवस पर बाल आयोग की बैठक, बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता, ज्वाइंट एक्शन प्लान लागू करने पर दिया जोर

देहरादून: अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में आईसीडीएस सभागार में एक विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य बच्चों और किशोरों में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के लिए बनाए गए ज्वाइंट एक्शन प्लान की प्रगति की समीक्षा करना था।

बाल आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने विभिन्न विभागों से पूर्व में किए गए कार्यों और वर्तमान प्रयासों को साझा करने को कहा। बैठक में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के संयुक्त निदेशक डॉ. एस.डी. बर्मन ने बताया कि मादक पदार्थों का सेवन करने वाले बच्चों और किशोरों की संख्या चिंताजनक है—लगभग 13 प्रतिशत—but उपचार के लिए आगे आने वालों की संख्या मात्र 5 प्रतिशत है। उन्होंने टेली-मानस टोल फ्री नंबर 14416 और उत्तराखंड में जल्द शुरू होने वाले ई-मानस पोर्टल की जानकारी भी दी।

बैठक में एनएचएम, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, समाज कल्याण, खाद्य सुरक्षा, औषधि नियंत्रक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, महिला कल्याण, शिक्षा विभाग और नशा विरोधी एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने अपने विभागीय प्रयास और आगामी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।

महत्वपूर्ण निर्देश व निर्णय:

शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में नशा मुक्ति पहरी क्लब गठित करने के निर्देश दिए गए।

आबकारी विभाग को स्कूलों के पास शराब की दुकानें न खोलने की सख्त हिदायत दी गई।

महिला व समाज कल्याण विभाग ने पुनर्वास और बचाव कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में नशे की रोकथाम के लिए भविष्य की रणनीति साझा की।

ऑनलाइन माध्यम से जुड़े सभी जनपदों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों और आ रही चुनौतियों की जानकारी दी। बैठक के अंत में डॉ. गीता खन्ना ने सभी जिलों को कार्यों और चुनौतियों का लिखित विवरण आयोग को भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी विभागों के प्रयासों की सराहना करते हुए ज्वाइंट एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने और विभागीय समन्वय बनाए रखने की अपील की। साथ ही निर्देश दिए कि सभी सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नशा सहायता हेल्पलाइन नंबर जैसे चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), साइबर हेल्पलाइन (1930), टेली-मानस (14416), और मानस नारकोटिक्स (1933) को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।

 

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