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श्रीनगर गढ़वाल: मेडिकल कॉलेज में झारखंड की छात्रा ने की आत्महत्या, छात्रावास में पंखे से लटका मिला शव

झारखंड की रहने वाली 27 वर्षीय एनाटॉमी की छात्रा अलकनंदा हॉस्टल में रह रही थी,  पुलिस कर रही मामले की जांच, शव पोस्टमार्टम को भेजा गया.

श्रीनगर गढ़वाल:  श्रीनगर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में उस समय हड़कंप मच गया जब कॉलेज की अलकनंदा छात्रावास में रहने वाली एक पीजी छात्रा का शव हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक छात्रा की पहचान झारखंड के रांची निवासी 27 वर्षीय युवती के रूप में हुई है, जो मेडिकल कॉलेज में एनाटॉमी विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) प्रथम वर्ष की छात्रा थी।

घटना सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे की बताई जा रही है। जब छात्रा काफी देर तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, तो उसकी सहपाठियों ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर छात्रावास प्रशासन को सूचित किया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो अंदर छात्रा का शव पंखे से लटका मिला। प्राथमिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस अन्य सभी पहलुओं से भी जांच कर रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, मृतका ने एमबीबीएस की पढ़ाई बिहार की राजधानी पटना से की थी और हाल ही में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पीजी में दाखिला लिया था। छात्रा अलकनंदा छात्रावास के एक कमरे में अकेली रह रही थी। पुलिस ने कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं किया है, जिससे आत्महत्या के कारणों का तत्काल पता नहीं चल पाया है।

पुलिस के अनुसार, कमरे की स्थिति सामान्य थी और शव पंखे से एक दुपट्टे के सहारे लटका मिला। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने कमरे की बारीकी से जांच की। पुलिस ने मोबाइल फोन, डायरी और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं जब्त कर ली हैं, जिनकी जांच की जा रही है। छात्रा के माता-पिता को घटना की सूचना दे दी गई है और उनके आने का इंतजार किया जा रहा है।

कॉलेज प्रशासन और सहपाठी छात्र-छात्राएं इस घटना से स्तब्ध हैं। कॉलेज प्राचार्य डॉ. ____ ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि छात्रा पढ़ाई में सामान्य थी और अब तक किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना से पूरा कॉलेज शोक में है और छात्रा के परिजनों के साथ हम पूरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं।

छात्रावास की अन्य छात्राओं ने बताया कि मृतका कम बोलने वाली और शांत स्वभाव की थी। वह अक्सर अकेले ही रहती थी लेकिन पढ़ाई में काफी समर्पित थी। किसी प्रकार की मानसिक परेशानी या किसी के साथ झगड़े की बात सामने नहीं आई है।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) पौड़ी डॉ. ने बताया कि मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि छात्रा के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की भी जांच की जाएगी, ताकि यह पता चल सके कि उसे किसी प्रकार की मानसिक परेशानी थी या नहीं। साथ ही कॉलेज और हॉस्टल प्रशासन से भी पूछताछ की जाएगी।

यह घटना न केवल छात्रावास में रहने वाले अन्य छात्रों को झकझोर गई है, बल्कि यह सवाल भी खड़े करती है कि क्या मेडिकल शिक्षा जैसे कठिन क्षेत्र में छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उचित सहयोग और सलाह नहीं मिल पा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के दबाव के साथ-साथ भावनात्मक समर्थन की भी आवश्यकता होती है।

फिलहाल, छात्रा के परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा है और उनके बयान के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से मेडिकल कॉलेज में मातम पसरा हुआ है और सभी लोग शोक में हैं।

यह दुखद घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज और शिक्षा संस्थानों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। पढ़ाई के साथ-साथ भावनात्मक और मानसिक सहयोग की व्यवस्था भी बेहद जरूरी है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

 

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