पौड़ी गढ़वाल के भगवती तलिया अस्पताल की स्थिति उजागर करने पर पत्रकार को बताया गया भ्रामक
ग्रामीणों ने राजीव ढौंडियाल के समर्थन में निकाली रैली, स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप: अस्पताल में नहीं डॉक्टर, न दवा, घास तक काटने को नहीं कर्मी
पौड़ी गढ़वाल: हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों में उत्तराखंड के साथ-साथ प्रवासी और विदेशों में कार्यरत उत्तराखंडी नागरिकों ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाई। ऐसा ही उदाहरण पेश किया आज तक चैनल में कार्यरत युवा पत्रकार राजीव ढौंडियाल ने, जो मतदान के लिए अपने गांव भगवती तलिया (श्रीनगर गढ़वाल विधानसभा) पहुँचे।
राजीव ने गांव पहुंचकर वहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की हालत को देखकर हैरानी जताई। उन्होंने अस्पताल की दुर्दशा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया और तीखे सवाल पूछे –
> “क्या पहाड़ के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता नहीं है? क्या सरकार को लगता है कि यहां कोई बीमार ही नहीं होता?”
उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड देने से सुविधा नहीं मिलती, सुविधा के लिए अस्पताल में व्यवस्था होनी चाहिए। यह सवाल और वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
स्वास्थ्य विभाग का जवाब: ‘भ्रामक वीडियो’
वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), पौड़ी ने वीडियो को “भ्रामक” बताया और कहा कि अस्पताल में नियुक्त डॉक्टर पीजी कोर्स पर हैं, जबकि फार्मासिस्ट यात्रा ड्यूटी पर गई हैं। विभाग ने अस्पताल की क्षमता को सीमित बताते हुए राजीव की रिपोर्ट को “तथ्यहीन” बताया और कहा कि इससे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का समर्थन: “वीडियो नहीं, सच्चाई है”
स्वास्थ्य विभाग के खंडन के बाद गांववासियों ने एकजुट होकर राजीव ढौंडियाल का समर्थन किया। लोगों ने कहा कि यह वीडियो पूरी तरह सत्य है और जो हालत वीडियो में दिखी है, वही वास्तविकता है।
स्थानीय निवासी बोले –
> “छोटी-मोटी बीमारी और पट्टी के अलावा इस अस्पताल में कोई इलाज नहीं होता। घास तक खुद काटनी पड़ती है। ऐसा अस्पताल किस काम का?”
इसके बाद भारी बारिश के बीच दर्जनों गांवों के लोगों ने रैली निकालकर राजीव का साथ दिया। भगवती तलिया सहित आसपास के 8-10 गांवों से ग्रामीण पहुंचे और खुद अस्पताल की जमीनी हकीकत दोहराई।
फिर पूछा गया सवाल – अब क्या कहेंगे सरकार?
जनता के समर्थन के बाद राजीव ढौंडियाल ने एक और सवाल सोशल मीडिया पर पूछा –
> “मेरे वीडियो को तो भ्रामक कहा गया, अब इतने सारे लोगों की आवाज को भी आप नकार देंगे? अब क्या कहेंगे आप?”
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार की “स्वस्थ्य उत्तराखंड” छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस क्षेत्र से स्वयं स्वास्थ्य मंत्री विधायक हैं, वहां अगर स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी दयनीय है, तो अन्य दुर्गम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं।
एक आवाज, हजारों सवाल..
राजीव की एक रिपोर्ट ने न सिर्फ एक अस्पताल की सच्चाई उजागर की, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता और जवाबदेही को भी कठघरे में खड़ा किया है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस जनआंदोलन रूपी आवाज को सुनते हैं या फिर उसे भी ‘भ्रामक’ बताकर दरकिनार कर देते हैं।
