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गढ़वाल: 15 साल से अधर में लटका जवाडीरोला पुल निर्माण, सिर्फ वादे, नहीं विकास, पुल न बनने से सड़क से वंचित दर्जनों गांव

जनता तैरती रही, सरकार बहाने बनाती रही – जवाडीरोला पुल का हाल बेहाल
पौड़ी के ग्रामीणों का दर्द, दो पिलर बने, पुल नहीं – डेढ़ दशक से जारी इंतज़ार

पौड़ी गढ़वाल: पौड़ी गढ़वाल जनपद के नैनीडोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले रौंदेड़ी–पुनोडी–चिल्लाऊं सड़क मार्ग पर बनने वाला जवाडीरोला पुल बीते 15 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। सन 2006 में इस पुल को स्वीकृति मिली थी, लेकिन तब से लेकर अब तक केवल दो पिलर खड़े कर के पुल निर्माण की इतिश्री कर दी गई है। दर्जनों गांव आज भी सड़क से पूरी तरह कटे हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय विधायक द्वारा पिछले विधानसभा चुनाव (2020/21) के दौरान इस अधूरे पुल का उद्घाटन किया गया था, लेकिन पुल निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। ग्रामीणों का आरोप है कि यह उद्घाटन केवल चुनावी दिखावा था। निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पुल न होने के कारण बारिश के मौसम में ग्रामीणों को उफनती नदी पार कर जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

विकास के नाम पर सिर्फ वादे, हकीकत में उपेक्षा

ग्रामीणों ने कई बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल, जिला प्रशासन और तीन बार बदल चुके स्थानीय विधायकों को ज्ञापन देकर अपनी समस्याएं बताई हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विभाग कभी बजट की कमी का बहाना बनाता है तो कभी जल्द काम शुरू होने का आश्वासन देता है। नतीजा – पंद्रह साल बाद भी पुल वहीं का वहीं।

पुनोडी, चिल्लाऊं, और आस-पास के गांवों के लोग खासकर गर्भवती महिलाओं, बीमार या बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने के लिए घंटों पैदल चलने को मजबूर हैं। बरसात में नदी उफान पर होती है, तब हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। कई बार लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और नेताओं की इस बेरुखी के चलते अब कई परिवार गांव छोड़ चुके हैं।

पलायन की जड़ में बुनियादी सुविधाओं की कमी

गढ़वाल क्षेत्र में बढ़ते पलायन का यह पुल एक प्रतीक बन चुका है। जब सरकारें बुनियादी सुविधाएं नहीं देतीं, तो लोग मजबूरी में अपने पुश्तैनी गांव छोड़ देते हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या उनका विकास केवल कागजों और चुनावी घोषणाओं तक ही सीमित रहेगा?

स्थानीय निवासी अब सख्त रूख अपनाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

रौंदेड़ी–पुनोडी–चिल्लाऊं सड़क मार्ग पर पुल का निर्माण सिर्फ एक बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को अब वादों की जगह ज़मीनी स्तर पर काम करके इन ग्रामीणों को उनका हक देना चाहिए।

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