मसूरी: उत्तराखंड की मनमोहक वादियों में फिल्म निर्माताओं का लगातार आना-जाना बना रहता है। यहां की ऊंची पहाड़ियाँ, सुरम्य घाटियाँ, कल-कल बहती नदियाँ, झरनों की मधुर ध्वनि और घने हरे-भरे जंगल हर किसी को आकर्षित करते हैं। यही प्राकृतिक सौंदर्य उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए एक बेहतरीन और पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाता है।
हालांकि, इस खूबसूरत परिदृश्य के बीच उत्तराखंड फिल्म, टेलीविजन एवं रेडियो एसोसिएशन ने गहरी नाराजगी जताई है और राज्य की फिल्म इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
मसूरी में उत्तराखंड फिल्म, टेलीविजन एवं रेडियो एसोसिएशन (UFTARA) के पदाधिकारियों ने राज्य की फिल्म इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष प्रदीप भंडारी और महामंत्री कांता प्रसाद ने कहा कि फिल्म नीति लागू होने के बावजूद इसका लाभ ज़मीनी स्तर पर नहीं पहुंच रहा है।

फिल्म बोर्ड के अभाव से बढ़ रही समस्याएं
एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय से फिल्म बोर्ड के गठन में देरी के कारण पूरी इंडस्ट्री प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि इसके चलते कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं को प्रशासनिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सब्सिडी और पुरस्कार राशि पर सवाल
फिल्म निर्माताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा घोषित 50% सब्सिडी का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही पिछले लगभग 10 वर्षों से लंबित करीब 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी अब तक जारी नहीं की गई है, जिससे स्थानीय कलाकारों का मनोबल कमजोर हो रहा है।
सिनेमा हॉल और स्क्रीनिंग की समस्या
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय फिल्मों को बड़े सिनेमा हॉल में पर्याप्त स्क्रीनिंग नहीं मिलती, जिसके कारण स्थानीय फिल्में दर्शकों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पातीं। इसके विपरीत, बाहरी फिल्मों को अधिक अवसर और सुविधाएं मिलने का आरोप भी लगाया गया है।

अन्य राज्यों से पिछड़ता उत्तराखंड
संगठन के अनुसार पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार जैसे राज्य अपने फिल्म उद्योग को तेजी से विकसित कर रहे हैं, जबकि उत्तराखंड में स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और उद्योग संकट में दिख रहा है।
फिल्म बोर्ड गठन की मांग तेज
UFTARA ने सरकार से जल्द से जल्द “उत्तराखंड फिल्म बोर्ड” के गठन की मांग की है। संगठन का कहना है कि इसमें फिल्म जगत से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए ताकि नीतियों का सही क्रियान्वयन हो सके और लंबित भुगतान जल्द जारी किए जाएं।

सरकारी फिल्म नीति और संभावनाएं
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 3 फरवरी 2024 को “उत्तराखंड फिल्म नीति 2024” को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना, शूटिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना, सब्सिडी देना और रोजगार व पर्यटन को बढ़ावा देना था। उत्तराखंड को पहले “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” का अवॉर्ड भी मिल चुका है, लेकिन स्थानीय फिल्म उद्योग के अनुसार इन योजनाओं का लाभ अभी तक पूरी तरह नहीं मिल पाया है।
