संविधान, न्याय और जनादेश की जीत, सीता देवी मनवाल ने भुत्सी सीट पर संघर्ष के बाद रच दिया इतिहास
भुत्सी पंचायत सीट पर संवैधानिक जीत, सीता मनवाल ने नामांकन रद्द से लेकर जनादेश तक दर्ज की मिसाल
धनौल्टी (टिहरी): उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 में टिहरी जिले की भुत्सी जिला पंचायत सीट वार्ड संख्या 10 से एक ऐतिहासिक और संघर्षपूर्ण जीत की कहानी सामने आई है। यह जीत सिर्फ मतों की नहीं, बल्कि संविधान, न्यायपालिका और जनविश्वास की भी जीत मानी जा रही है। इस सीट से चुनाव जीतने वाली सीता देवी मनवाल ने पहले नामांकन रद्द होने की चुनौती झेली, फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी, और अंततः जनता के वोट से विजयी घोषित हुईं।
नामांकन से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
चुनाव की शुरुआत से ही सीता देवी मनवाल का सफर बेहद संघर्षमय रहा। रिटर्निंग अधिकारी ने उनके नामांकन को तकनीकी कारणों से अमान्य घोषित कर दिया था। इसके बाद सरिता नकोटी को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया। लेकिन सीता देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और अदालत ने उनके पक्ष में निर्णय सुनाते हुए चुनाव चिन्ह आवंटित करने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट के इस आदेश को भाजपा समर्थित प्रत्याशी सरिता नकोटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद दोनों प्रत्याशियों के बीच सीधे मुकाबले का रास्ता साफ हुआ।
जनता ने दी न्याय को मंजूरी
जब जनता के सामने चुनाव हुआ तो उन्होंने सीता देवी मनवाल के संघर्ष को सराहा और वोट के रूप में उन्हें समर्थन दिया। सीता देवी को कुल 4596 वोट मिले, जबकि भाजपा समर्थित सरिता नकोटी को 4351 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार सीता देवी ने 245 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
महिला नेतृत्व की नई मिसाल
सीता देवी की इस जीत को केवल एक चुनावी जीत नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह लोकतंत्र में भरोसे, महिला नेतृत्व की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की मिसाल बन चुकी है। उन्होंने इस संघर्ष में अपने संयम, धैर्य और विश्वास को बनाए रखा और जनता ने भी उनके साथ न्याय किया।
सीता देवी ने अपनी जीत को “संविधान, न्यायपालिका और जनता की संयुक्त जीत” बताते हुए इसे महिलाओं और संघर्षशील जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा बताया। उनकी यह यात्रा आने वाले समय में ग्रामीण राजनीति में न्याय और अधिकार के लिए लड़ने वाले नेताओं के लिए एक उदाहरण बनी रहेगी।
