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पहाड़ों में दौड़ेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना रफ्तार पर, 2026 तक पूरा होने का अनुमान

ऋषिकेश: उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की अद्यतन प्रगति की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह सपना अब धीरे-धीरे साकार होने के करीब पहुंच गया है। जल्द ही राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में भी ट्रेन की सीटी गूंजेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर परियोजना से जुड़ी नई तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में यह परियोजना अत्याधुनिक तकनीकों और मशीनों के माध्यम से दिन-रात प्रगति कर रही है। 125.20 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के 2026 तक पूरा होने का अनुमान है।

पांच जिलों को जोड़ेगी रेल लाइन:

यह परियोजना न केवल भौगोलिक दृष्टि से अहम है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है। इस रेलवे लाइन से देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे पांच जिलों को सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। इससे पहाड़ी क्षेत्रों की पहुंच देश के अन्य हिस्सों से और अधिक सुगम हो जाएगी।

12 स्टेशन, 16 सुरंगें और आधुनिक निर्माण:

परियोजना के अंतर्गत 12 नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। चूंकि उत्तराखंड का पहाड़ी भूगोल भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील है, इसलिए परियोजना का एक बड़ा हिस्सा सुरंगों के माध्यम से विकसित किया जा रहा है। इसमें 16 मुख्य सुरंगें (105 किमी) और 12 एस्केप सुरंगें (98 किमी) बनाई जा रही हैं, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकेगी।

ऑल-वेदर कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा:

यह रेल लाइन उत्तराखंड के लिए एक ऑल-वेदर कनेक्टिविटी का विकल्प प्रदान करेगी, जिससे बारिश और बर्फबारी में भी निर्बाध परिवहन संभव हो सकेगा। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल चारधाम यात्रा अधिक सरल हो जाएगी, बल्कि चीन सीमा तक की पहुँच भी अधिक सुलभ होगी। इसके चलते राज्य के पर्यटन क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिकी को बल:

रेल परियोजना के माध्यम से राज्य के हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे स्थानीय आर्थिकी को मजबूती मिल रही है। साथ ही, भविष्य में इस रेलमार्ग के शुरू होने के बाद व्यापार और परिवहन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

यात्रा का समय होगा कम:

फिलहाल ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यात्रा में लगभग 7 घंटे लगते हैं। रेललाइन पूरी होने के बाद यह समय घटकर केवल 2 घंटे रह जाएगा। इससे न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि समय और धन की भी बचत होगी।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना उत्तराखंड के इतिहास की सबसे बड़ी और रणनीतिक परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना जहां पर्यटन, परिवहन और रोजगार के नए द्वार खोलने वाली है, वहीं यह भविष्य के उत्तराखंड की आधारशिला भी साबित हो सकती है। यदि निर्धारित समय में कार्य पूरा हो गया, तो 2026 उत्तराखंड के लिए रेल इतिहास में एक स्वर्णिम वर्ष बन सकता है।

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