हल्द्वानी: कुमाऊं मंडल के सबसे बड़े डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय और राजकीय मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 659 उपनल कर्मचारी पिछले छह महीनों से वेतन न मिलने से नाराज़ हैं। लगातार उपेक्षा और अनदेखी से परेशान ये कर्मचारी अब आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। बुधवार, 20 अगस्त को उपनल कर्मियों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी के कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और भीख मांगकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन कठिनाई में गुजर रहा है। कई कर्मचारियों ने बताया कि घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और किराए के मकानों में रहने वाले कर्मचारियों को मकान मालिक घर खाली करने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं, जबकि वे लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे अस्पताल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर बड़ा आंदोलन करेंगे। इससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं और भी ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। पहले से ही कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों को इलाज में दिक्कतें आ रही हैं।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि वे पिछले 20 से 25 सालों से लगातार अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में सेवाएं दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की थी, लेकिन अब उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है। सरकार पद सृजित न होने का हवाला देकर वेतन रोक रही है, जिससे उनका जीवन संकट में आ गया है।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन स्तर पर वार्ता चल रही है और जल्द ही समाधान निकलेगा। उनका कहना है कि जैसे ही बजट जारी होगा, कर्मचारियों का बकाया वेतन दे दिया जाएगा।
वहीं, कर्मचारियों का कहना है कि गैरसैंण में इस समय विधानसभा सत्र चल रहा है, ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विधानसभा के पटल पर इस मुद्दे पर घोषणा करनी चाहिए। कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार शासन और सरकार से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उधर, आम मरीज और उनके परिजन भी कर्मचारियों की हड़ताल से प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन कर्मचारी न होने से व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं। मरीजों ने भी सरकार से जल्द समाधान की अपील की है।
फिलहाल, कर्मचारियों के आंदोलन से यह साफ है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब सबकी निगाहें गैरसैंण विधानसभा सत्र और मुख्यमंत्री की ओर टिकी हैं कि वे उपनल कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी हल निकालते हैं या नहीं।
