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उत्तराखंड: मां चली गईं तो पिता ने भी छोड़ा सहारा… लेकिन डीएम बंसल बने चार अनाथ बहनों के संरक्षक

देहरादून: कहते हैं कि मां के साए के बिना जीवन अधूरा हो जाता है और जब पिता भी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लें तो हालात और भी मुश्किल हो जाते हैं। देहरादून की चार बहनों की जिंदगी में भी कुछ ऐसा ही हुआ। मां की डूबने से मौत हो गई और पिता ने परिवार की जिम्मेदारी उठाने से इनकार कर दिया। ऐसे में बड़ी बहन सरिता ही तीनों छोटी बहनों का सहारा बन गई। गरीबी के कारण न तो घर चलाने की स्थिति थी और न ही पढ़ाई जारी रखने का साधन। इसी दर्द को लेकर सरिता अपनी तीनों बहनों के साथ जिलाधिकारी सविन बंसल के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंची।

रोते हुए सरिता ने डीएम को अपनी आपबीती सुनाई। उसने कहा कि मां के निधन के बाद पिता ने भी हमें छोड़ दिया। अब घर की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है, लेकिन इतनी गरीबी है कि हम चारों बहनें पढ़ाई से वंचित हैं। सरिता की यह पीड़ा सुनकर जिलाधिकारी सविन बंसल भावुक हो उठे और तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने तीनों छोटी बहनों का सरकारी स्कूल में दाखिला कराने और सरिता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया।

डीएम के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने तेजी से कदम उठाए और तीनों छोटी बहनों का दाखिला राजकीय प्राथमिक विद्यालय, लाडपुर (रायपुर) में करा दिया। साथ ही बच्चियों को यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य जरूरी सामग्री भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने सरिता के लिए GMDIC को पत्र भेजा है ताकि उसे कौशल विकास प्रशिक्षण देकर रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।

डीएम सविन बंसल ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों का वास्तविक भविष्य गढ़ती है। हर बेटी को पढ़ने का अधिकार है और कोई भी बच्ची केवल आर्थिक मजबूरी की वजह से शिक्षा से वंचित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के तहत ऐसे परिवारों की पहचान कर रहा है, जहां गरीबी के कारण बेटियां पढ़ाई से दूर हैं। उन्हें न सिर्फ सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा, बल्कि पढ़ाई के लिए आवश्यक सभी सामग्री भी मुफ्त मुहैया कराई जाएगी।

डीएम की पहल से अब सरिता की छोटी बहनें पढ़ाई कर पाएंगी और सरिता भी आत्मनिर्भर बन सकेगी। यह फैसला न केवल इन बहनों की जिंदगी बदलने वाला साबित होगा, बल्कि समाज को यह संदेश भी देगा कि संवेदनशील प्रशासन ही आमजन का असली संबल बन सकता है।

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