देहरादून: उत्तराखंड के मदरसों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कई मदरसों में उन बच्चों के नाम पर मिड-डे मील का पैसा लिया जा रहा था, जो सालों पहले पढ़ाई छोड़ चुके थे। इस घोटाले का खुलासा राज्य सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड भंग करने की घोषणा के बाद शिक्षा विभाग की टीमों द्वारा की गई छापेमारी में हुआ।
शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों ने बुधवार को चार मदरसों का औचक निरीक्षण किया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक चंद्र शेट के नेतृत्व में दो टीमों ने यह जांच की। पहली टीम तहसीलदार विकास अवस्थी के नेतृत्व में भगेड़ी नहावनपुर के मदरसा “तूल आलीम पब्लिक स्कूल” में पहुंची। दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि दो से तीन साल पहले पढ़ाई छोड़ चुके छात्रों के नाम उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज हैं। इसके अलावा मिड-डे मील के लगभग तीन लाख रुपये सीधे प्रबंधक के खाते में जमा पाए गए। स्कूल के पास बिल और राशन का कोई ठोस प्रमाण नहीं था।
दूसरी टीम ग्रीन पार्क स्थित मदरसा “जामिया फेज-ए-आम” में गई। यहां निरीक्षण में यह पाया गया कि उपस्थिति रजिस्टर में एक अक्टूबर के बाद किसी बच्चे का कोई रिकॉर्ड नहीं था। पंजीकृत 75 छात्रों में से केवल 20 से 25 छात्र मौजूद थे। इनके बारे में भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। मिड-डे मील के बर्तन और राशन भी गायब थे। इसी तरह ग्रीन पार्क के दूसरे मदरसा “दारूल फलां” में 36 छात्रों का रिकॉर्ड मिला, जिसमें से 23 छात्र कई साल पहले पढ़ाई छोड़ चुके थे, फिर भी उनके नाम पर मिड-डे मील का लाभ लिया जा रहा था।
सीत मोहल्ला स्थित मदरसा “मकदूम बक्श” में व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गई। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक चंद्र शेट ने बताया कि छापे की रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। निरीक्षण में खंड शिक्षा अधिकारी अभिषेक शुक्ला और रामनगर हाईस्कूल के प्रधानाचार्य एनडी शर्मा भी मौजूद रहे।
