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बिना हाथों के जन्मी शीतल देवी ने रचा इतिहास, बनीं भारत की पहली पैरा आर्चर जो एबल-बॉडी टीम में हुईं चयनित

PARA ARCHER SHEETAL DEVI: वर्ल्ड चैंपियन पैरा आर्चर शीतल देवी ने भारत की एबल-बॉडी जूनियर तीरंदाजी टीम में सेलेक्ट होकर इतिहास रच दिया है.

PARA ARCHER SHEETAL DEVI: जम्मू-कश्मीर की 18 वर्षीय वर्ल्ड चैंपियन पैरा आर्चर शीतल देवी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। जन्म से ही बिना हाथों के होने के बावजूद उन्होंने अपने जुनून और संघर्ष के बल पर वो मुकाम हासिल किया है, जो अब तक किसी भारतीय पैरा एथलीट ने नहीं पाया था।
अब शीतल को जेद्दा में होने वाले एशिया कप स्टेज-3 के लिए भारत की एबल-बॉडी जूनियर टीम में शामिल किया गया है। यह पहला मौका है जब किसी पैरा एथलीट को एबल-बॉडी प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है।

हर हार से सीखा, सपने को दिया नया रूप

सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए शीतल ने लिखा —

> “जब मैंने कॉम्पिटिशन शुरू किया तो मेरा एक छोटा सा सपना था — एक दिन एबल-बॉडी खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करना। मैं पहले सफल नहीं हुई लेकिन मैंने हार नहीं मानी, हर हार से सीखा। आज वह सपना एक कदम और करीब आ गया है।”

शीतल कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रशिक्षण लेती हैं। उन्होंने अपने पैरों और कंधों की मदद से धनुष चलाने की ऐसी अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसने दुनियाभर के तीरंदाजी प्रेमियों का ध्यान खींचा है।

नेशनल ट्रायल्स में किया कमाल

सोनीपत में हुए नेशनल सिलेक्शन ट्रायल्स में शीतल ने 60 से अधिक एबल-बॉडी तीरंदाजों के बीच शानदार प्रदर्शन किया और कुल मिलाकर तीसरा स्थान हासिल किया।

उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 703 अंक (पहले में 352, दूसरे में 351) जुटाए।

यह स्कोर क्वालिफिकेशन लीडर तेजस साल्वे के समान था।

फाइनल में तेजल 15.75 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहीं, वैदेही जाधव दूसरे पर और शीतल 11.75 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

पैरा आर्चर एबल-बॉडी इवेंट में कैसे खेल सकते हैं?

वर्ल्ड आर्चरी के अनुसार, क्लासिफाई किए गए पैरा एथलीट्स सहायक उपकरणों (जैसे माउथ टैब या विशेष रिलीज एड्स) की मदद से एबल-बॉडी प्रतियोगिताओं में भी भाग ले सकते हैं।
खेल के नियम उन्हें समान अवसर देते हैं, और इसी के तहत शीतल जैसे प्रतिभाशाली एथलीट अब मुख्यधारा की स्पर्धाओं में भी अपनी क्षमता दिखा रहे हैं।

2024 में पेरिस पैरालंपिक में मिश्रित टीम इवेंट में कांस्य जीतने के बाद, शीतल ने इसी वर्ष वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब जीतने वाली पहली बिना हाथों वाली महिला आर्चर बनकर इतिहास रचा था।
वह तुर्की की पैरालंपिक चैंपियन ओज़्नूर क्यूर गिर्दी से प्रेरणा लेती हैं, जो एबल-बॉडी प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेती हैं।

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