चमोली: विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2025 का समापन आज बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के साथ हो गया। दोपहर 2:56 बजे विधि-विधान के साथ धाम के कपाट बंद किए गए, जिसमें कई श्रद्धालु और दर्शनार्थी मौजूद रहे।
धाम को इस अवसर पर 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया और सेना के बैंड की धुन तथा भगवान बदरी विशाल के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना। भगवान बदरी विशाल की स्वयंभू मूर्ति और भगवान उद्धव व कुबेर जी की मूर्तियाँ अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों की ओर रवाना कर दी गईं।
भगवान बदरी विशाल की मूल शालिग्राम मूर्ति कभी बदरीनाथ से बाहर नहीं लाई जाती, लेकिन पूजा के लिए उत्सव मूर्ति को ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में विराजित किया जाएगा। वहीं, भगवान उद्धव और कुबेर जी की मूर्तियाँ पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर में शीतकालीन प्रवास में रहेंगी। कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ धाम में चहल-पहल समाप्त हो गई और सन्नाटा पसरा। श्रद्धालु अब ज्योतिर्मठ और पांडुकेश्वर में स्थित मूर्तियों के दर्शन कर सकते हैं.

बदरीनाथ धाम को कहा जाता है धरती का बैकुंठ: गौर हो कि बदरीनाथ धाम चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. जो हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में ये एक है. जो भगवान विष्णु को समर्पित है. बदरीनाथ धाम समुद्र तल से 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. जो देश के चारधामों से एक है. इसके अलावा यह छोटे चारधाम (उत्तराखंड के चारधाम) में भी से एक है.
बदरीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है. मंदिर परिसर में 15 मूर्तियां मौजूद हैं. इनमें सबसे प्रमुख भगवान विष्णु की एक मीटर ऊंची काले पत्थर शालिग्राम की प्रतिमा है. यहां भगवान विष्णु ध्यान मग्न मुद्रा में विराजमान हैं. जबकि, प्रतिमा के बगल में कुबेर, लक्ष्मी और नारायण की मूर्तियां है.

बदरीधाम में बदरी नारायण के पांच स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है. भगवान विष्णु के इन पांच रूपों को ‘पंच बद्री’ के नाम से भी जाना जाता है. बदरीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा अन्य चार बद्रियों के मंदिर भी चमोली में स्थित हैं. बदरीनाथ पांचों मंदिरों में से मुख्य है. इसके अलावा योगध्यान बद्री, भविष्य बद्री, वृद्ध बद्री, आदिबद्री हैं.
दक्षिण भारत के होते हैं बदरीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी: कहा जाता है कि भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों धाम में से एक के रूप में स्थापित किया था. यह मंदिर 3 भागों में विभाजित है. जिसमें गर्भगृह, दर्शन मंडप और सभामंडप. शंकराचार्य व्यवस्था के मुताबिक, बदरीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से आते हैं.
