79 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, पिछले लंबे समय से चल रहे थे बीमार
दस दिन श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में रहे भर्ती , अपने आवास पर ली अंतिम सांस
स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी ने दी पृथक राज्य प्राप्ति के लिए थी फील्ड मार्शल की उपाधि, राज्य आंदोलन में रहे अग्रणी
देहरादून: उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का मंगलवार को निधन हो गया है। उनकी उम्र 79 वर्ष थी। उन्हें फील्ड मार्शल के नाम से पहचाना जाता था। वह पिछले लंबे समय से बीमार चल रहे थे। श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में दस दिन उनका उपचार चला। इस दौरान वह वेंटीलेटर आईसीयू पर रहे। पर अंतिम क्षण में डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। जिसके बाद आज दोपहर को उन्हें अस्पताल से उनके हरिद्वार स्थित आवास (तरुण हिमालय) ले जाया गया। शाम को उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को मोक्षधाम हरिद्वार में किया जाएगा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित तमाम राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं व राज्य आंदोलनकारियों ने फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के निधन पर दुख जताया। सीएम ने एक्स पर पोस्ट लिखते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी व पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर जनसेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव अविस्मरणीय हैं। वहीं यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती, संरक्षक काशी सिंह ऐरी, पुष्पेश त्रिपाठी, अनिल थपलियाल आदि नेताओं ने भी पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट के निधन पर दुख जताया है। कहा कि उनका निधन दल के लिए अपूरर्णीय क्षति है। फील्ड मार्शल के नाम से पहचान रखने वाले दिवाकर भट्ट राज्य आंदोलन के दौरान सबसे आक्रामक और समर्पित नेताओं में गिने जाते हैं।
राज्य आंदोलन के दौरान स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी ने उन्हें श्रीनगर अधिवेशन के दौरान फील्ड मार्शल की उपाधि दी थी। ठीक इसी बहादुरी भाव से उन्होंने अपना राजनीतिक व सामाजिक जीवन भी जिया है। वह उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। उनकी राजनीतिक पहचान राज्य आंदोलन के रणबांकुरे के रूप में बनी। यूकेडी में लंबे समय तक रहते हुए उन्होंने आंदोलन किया। नवंबर 2000 में पृथक राज्य उत्तराखंड बनने के बाद भी वह यूकेडी से जुड़े रहे। बाद में उन्होंने यूकेडी के टिकट पर देवप्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और विधायक बने। फिर भाजपा की सरकार को समर्थन देकर कैबिनेट मंत्री बने। हालांकि बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन यहां पर वह ज्यादा दिन तक टिके नहीं। फिर यूकेडी में घर वापसी की। दल ने भी उन्हें केंद्रीय अध्यक्ष बनाया। वर्तमान में वह दल के संरक्षक मंडल में शामिल थे। दिवाकर भट्ट सिर्फ नेता नहीं, बल्कि उस आंदोलन की आत्मा भी थे जिसने राज्य को आकार दिया। लंबी बीमारी के बाद आज उनका निधन हो गया है। राज्य आंदोलन के दौरान उनके सहयोगी रहे तमाम राज्य आंदोलनकारी उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
दिवाकर भट्ट के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है, राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर जन सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव अविस्मरणीय रहेंगे।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
दिवाकर भट्ट का निधन राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है। स्व. भट्ट ने उत्तराखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और एक शक्तिशाली नेतृत्व दिया। कांग्रेस परिवार इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है।
गणेश गोवियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
दिवाकर भट्ट के निधन पर दुखी हूं। राज्य निर्माण आंदोलन एवं उसके विकास में उनका योगदान अभूतपूर्व है। उनके नेतृत्व में हुए श्रीयंत्र टापू आंदोलन, राज्य निर्माण संघर्ष में मील का पत्थर साबित हुआ था।
महेंद्र भट्ट, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
उक्रांद नेता फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का निधन आंदोलनकारी शक्तियों के लिए बड़ा झटका है। विना दिवाकर भट्ट का नाम लिए उत्तराखंड आंदोलन का इतिहास अधूरा माना जाएगा। राज्य सरकार से तत्काल उनकी एक मूर्ति देहरादून और गैरसैंण में लगाए। मुख्यमंत्री धामी को चाहिए कि वह राज्य की जनता से दिवाकर भट्ट की अस्वस्थता के दिनों में वरती गई उपेक्षा के लिए माफी मांगे। भाकपा माले नेता राजा वहुगुणा की अस्वस्थता की और भी राज्य सरकार की वेरुखी को निंदनीय और अपमानजनक है।
धीरेंद्र प्रताप, चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक
