आरोपित पर 15 हजार रुपए का इनाम था घोषित
कर्नाटक राज्य की पुलिस को भी थी आरोपित की तलाश
देहरादून: खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर दून के एक सीनियर सिटीजन को मनी लॉन्ड्रिंग केस से नाम हटाने एवं खातों में जमा रकम का वेरिफिकेशन करने के नाम पर बुजुर्ग से 47 लाख रुपए की ठगी करने वाले को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित पर 15 हजार रुपए का ईनाम घोषित था। कर्नाटक पुलिस को भी उसकी तलाश थी ।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि माह अगस्त 2024 में एक शिकायत मिली। जिसमें दून निवासी एक 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक के साथ साइबर ठगों ने 47 लाख रुपए की साइबर ठगी की थी। जांच में सामने आया कि ठग और उसके गिरोह ने पीड़ित से सम्पर्क कर खुद को मुम्बई पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन किया और उसके खिलाफ फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस एवं गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद केस से नाम हटाने एवं खातों में जमा रकम का “वेरिफिकेशन” करने के नाम पर पीड़ित को बताए गए खातों में ट्रांजैक्शन करवाकर 47 लाख रूपए जमा करवा लिए। जांच में मास्टमाइण्ड अनमोल निवासी चुधरीवाली आदमपुर हिसार हरियाणा का नाम सामने आया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। जिस पर न्यायालय ने उसकी गिरफ्तारी को गिरफ्तारी वारण्ट जारी किए और उसकी गिरफ्तारी पर जुलाई 2025 में 15 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया। सात माह की कड़ी मशक्कत के बाद एसटीएफ ने इनामी ठग अनमोल निवासी चुघरीवाली आदमपुर हिसार हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया
हाउस अरेस्ट का डर दिखा डेढ़ लाख ठगे
देहरादून। दून में साइबर ठगों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में अजबपुर कला निवासी एक शख्स को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखा ठगों ने डेढ़ लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने खुद को एनआईए अधिकारी बताकर पीड़ित पर आतंकी संगठन के साथ मिलकर करोड़ों के काले धन के लेन-देन का डर दिखाया था। शिकायतकर्ता खुशहाल सिंह रावत निवासी ओम विहार माता मंदिर रोड ने बताया कि उसे एक अनजान नम्बर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुम्बई क्राइम ब्रांच और एनआईए का अधिकारी बताया। कॉलर ने बताया कि उनके दस्तावेजों से केनरा बैंक में फर्जी खाता खोलकर आतंकी संगठन के चेयरमैन के साथ मिलकर 538 करोड़ रुपए का अवैध लेन-देन किया गया है। ठगों ने डराया कि उसे डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद एक अन्य शख्स ने उसे खुद को एनआईए का डीआईजी बताते हुए दावा किया कि उसके नाम से अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। आरोपितों ने कार्रवाई से बचने की एवज में उससे डेढ़ लाख रुपए जमा करवा लिए। पुलिस मामले में जांच कर रही है।
