Udayprabhat
Breaking Newsदेशराजनीति

लोकसभा में आरक्षण और जनगणना पर गरमागरम बहस, अमित शाह-अखिलेश में तीखी नोकझोंक

  • लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक पेश
  • जाति जनगणना और आरक्षण को लेकर सत्ता–विपक्ष में तीखी बहस

नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक पेश किए गए, जिसके दौरान सदन में राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

“जनगणना पहले हो, सरकार जल्दबाजी में है” – अखिलेश यादव

बहस के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को लागू करने से पहले जनगणना कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना से बच रही है और जानबूझकर इसमें देरी कर रही है। सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर आपत्ति है।

“जाति जनगणना भी होगी” – अमित शाह

अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि देश में जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और इसके बाद जाति आधारित गणना भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि घरों की सूचीकरण प्रक्रिया जारी है और यह किसी जाति से संबंधित नहीं है। शाह ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जनगणना को जाति के आधार पर देखने की कोशिश गलत है।

धर्म आधारित आरक्षण पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद

अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का आरक्षण, विशेषकर मुसलमानों को दिया जाने वाला आरक्षण, संविधान के अनुरूप नहीं है। उनके इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।

सपा का विरोध और आरोप

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार के प्रस्तावित विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन को जनगणना से अलग करना और महिला आरक्षण में OBC व मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रावधान न करना गलत है।

बहस तेज होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा और सदस्यों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

Leave a Comment