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फॉरेंसिक साइंस में करियर की अपार संभावनाएं, मंजीरा देवी विश्वविद्यालय में हुआ सेमिनार

उत्तरकाशी: मंजीरा देवी विश्वविद्यालय में “फॉरेंसिक साइंस और करियर के अवसरों में इसकी संभावनाएं” विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कुलाधिपति डॉ. हरिशंकर नौटियाल, पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. जे. पी. पचौरी, शिक्षाविद डॉ. योगेश कुमार शर्मा तथा मैनेजिंग डायरेक्टर अधिवक्ता पवन नौटियाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति डॉ. भगवन नौटियाल ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे सेमिनार विद्यार्थियों को नए वैज्ञानिक क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सेमिनार के मुख्य वक्ता प्रति कुलपति एवं फॉरेंसिक साइंस के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में फॉरेंसिक साइंस का दायरा और व्यापक होगा। उन्होंने बताया कि सरकारी फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, पुलिस विभाग, न्यायालयों, केंद्रीय जांच एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। साथ ही साइबर अपराधों में वृद्धि के कारण साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ी है।

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार यादव ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से अपराध जांच को सटीक और निष्पक्ष बनाना है। उन्होंने बताया कि डीएनए विश्लेषण, फिंगरप्रिंट जांच, साइबर फॉरेंसिक, टॉक्सिकोलॉजी और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे क्षेत्रों ने अपराध जांच को नई दिशा दी है और न्याय प्रक्रिया को मजबूत बनाया है।

कार्यक्रम का संचालन रजिस्ट्रार डॉ. कपिल मोहन और डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने किया। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी जी.सी. मधुवाल, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, डॉ. राघवेंद्र उनियाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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