अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर बेरोजगार नर्सों का उग्र प्रदर्शन,
देहरादून: अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर जहां देशभर में नर्सिंग सेवाओं को सम्मान दिया जा रहा है, वहीं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ीं नर्सिंग अभ्यर्थी 31 घंटे बाद भी नीचे नहीं उतरीं, जबकि उनके समर्थन में साथी धरने पर डटे हुए हैं।
धूप-बारिश के बीच आंदोलन जारी
प्रदर्शनकारी नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। तेज धूप और बीच-बीच में बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी टस से मस नहीं हुए।
टंकी पर चढ़ी महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं। इससे आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलता नजर आ रहा है।

“हमारे लिए नर्स दिवस ब्लैक डे”
नवल पुंडीर बोले— रोजगार मिला होता तो मनाते जश्न
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं होना चाहिए था, लेकिन बेरोजगारी ने इस दिन को “ब्लैक डे” में बदल दिया है।
उन्होंने कहा,
“सुबह से हमें नर्स दिवस की शुभकामनाएं मिल रही हैं, लेकिन बेरोजगार होने के कारण उन संदेशों को स्वीकार करना भी मुश्किल लग रहा है।”
खाना-पानी तक पहुंचाने से रोका जा रहा
नवल पुंडीर ने प्रशासन पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि टंकी पर मौजूद साथियों तक खाना और पानी पहुंचाने में भी बाधाएं डाली जा रही हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि दोपहर में स्वास्थ्य महानिदेशिका के साथ वार्ता प्रस्तावित है। यदि बातचीत बेनतीजा रही तो आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई जाएगी।
159 दिनों से जारी है धरना
धरने पर बैठीं मधु उनियाल ने कहा कि वे पिछले 159 दिनों से वर्षवार नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन सरकार अब तक कोई समाधान नहीं निकाल पाई है।
उन्होंने कहा,
“फोन पर लगातार नर्स दिवस की शुभकामनाएं आ रही हैं, लेकिन जब रोजगार ही नहीं है तो इन शुभकामनाओं का क्या मतलब?”
प्रदर्शनकारी नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के मौके पर सरकार को वर्षवार नियुक्ति की घोषणा कर उन्हें “उपहार” देना चाहिए। उनका मानना है कि नर्सिंग पेशा समाज की रीढ़ है और इसके साथ लगातार उपेक्षा उचित नहीं है।
