नई दिल्ली। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। इस मुद्दे पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान के बाद सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सामाजिक चिंतक खुर्शीद अहमद सिद्दीकी ने कहा कि गाय के नाम पर होने वाली हिंसा से मुस्लिम समाज भी आहत है और इसका सम्मानजनक समाधान चाहता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि मुस्लिम नेतृत्व को आगे आकर यह संदेश देना चाहिए कि मुसलमान गाय को केवल मवेशी नहीं, बल्कि देश की बहुसंख्यक आबादी की धार्मिक आस्था “गौ माता” के रूप में सम्मान दें। उनका मानना है कि इससे सामाजिक समरसता और भाईचारा मजबूत होगा।
सिद्दीकी ने कहा कि यह पहल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
