चारधाम यात्रा के पीक सीजन में नहीं मिल सकी सेवाएं, अब मानसून सीजन में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मिलेगी मजबूती
देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने के करीब एक महीने बाद आखिरकार 216 नवचयनित चिकित्सकों की तैनाती प्रक्रिया पूरी हो सकी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 14 मई को अपने सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में 216 चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। सरकार की मंशा थी कि इन डॉक्टरों की तैनाती जल्द से जल्द राज्य के विभिन्न अस्पतालों में की जाए, ताकि लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य संस्थानों को राहत मिल सके। खासतौर पर चारधाम यात्रा के व्यस्त सीजन में इन चिकित्सकों की सेवाएं यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी साबित होतीं।
हालांकि नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद चिकित्सकों को कार्यस्थल आवंटित करने में स्वास्थ्य विभाग को लगभग एक महीने का समय लग गया। विभाग ने अब जाकर उनकी तैनाती सूची जारी की है। ऐसे में जिन डॉक्टरों से तत्काल सेवाएं मिलने की उम्मीद थी, वे पूरे पीक सीजन के दौरान अस्पतालों में योगदान नहीं दे सके।
स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से प्रदेश के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी की बात करता रहा है। कई जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ और सामान्य चिकित्सकों के पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद पोस्टिंग प्रक्रिया में हुई देरी ने विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब जबकि तैनाती आदेश जारी हो चुके हैं, इन चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ राज्य को मानसून सीजन में मिल सकेगा। बरसात के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाओं, जलजनित रोगों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मामले बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में नए डॉक्टरों की नियुक्ति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
इस बीच एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। चिकित्सा चयन बोर्ड ने प्रदेश में रिक्त पदों के सापेक्ष कुल 243 चिकित्सकों का चयन किया था, लेकिन इनमें से केवल 216 चिकित्सकों ने ही नियुक्ति पत्र प्राप्त किए। यानी 27 चयनित चिकित्सकों ने सरकारी सेवा ज्वाइन करने में रुचि नहीं दिखाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र में बेहतर वेतन, बड़े शहरों में कार्य करने के अवसर और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती की आशंका के कारण कई चिकित्सक सरकारी सेवा से दूरी बनाते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चयनित होने के बावजूद 27 चिकित्सकों ने सरकारी नौकरी क्यों नहीं स्वीकार की।
उधर, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पोस्टिंग से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और तैनाती सूची जारी कर दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए चिकित्सकों की नियुक्ति से प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होगी और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
