‘लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026’ में उत्तराखंड के सुझावों की सराहना
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस की जन-सहभागिता आधारित पुलिसिंग और आधुनिक सीमा सुरक्षा मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित देश की पहली ‘लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026’ में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित राज्य के पांच अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जिलों—ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी और चमोली—के पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया।
सम्मेलन में सीमा सुरक्षा, सीमा-पार आतंकवाद, संगठित अपराध, वित्तीय अपराध, अवैध धन प्रवाह, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और सीमा विकास में सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। उत्तराखंड पुलिस ने आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी, स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत करने, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए।

‘कम्युनिटी एंगेजमेंट फॉर बॉर्डर डेवलपमेंट’ सत्र में चम्पावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने उत्तराखंड पुलिस के ‘फाइव पिलर्स ऑफ कम्युनिटी फोर्स मल्टीप्लिकेशन’ मॉडल और सीमांत क्षेत्रों में आयोजित ‘रात्रि चौपाल’ अभियान की सफलता साझा की। साथ ही पिथौरागढ़ के ‘गुंजी मॉडल’ को रिवर्स माइग्रेशन के सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा के तहत सीमा सुरक्षा को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अगले तीन वर्षों में घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण तथा ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के माध्यम से सीमांत गांवों के विकास पर विशेष जोर देने की बात कही।

डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि सम्मेलन में साझा किए गए अनुभव और नवाचार सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और नागरिक सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
