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सत्य निकेतन इमारत हादसा: हादसे में मौत का आंकड़ा 6 पहुंचा, 11 लोगों का रेस्क्यू

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान मलबे से एक और शव बरामद होने के बाद हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। बचाव एजेंसियां अब भी मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कुछ ही सेकंड में इमारत का हिस्सा भरभराकर गिरता दिखाई दे रहा है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर पुलिस, दमकल विभाग, कैट्स एंबुलेंस समेत कई बचाव एजेंसियों की टीमें पहुंचीं।

40-50 साल पुरानी थी इमारत

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक हादसे वाली इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी बताई जा रही है। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी के रूप में किया जा रहा था।

बताया गया है कि हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक इमारत का एक हिस्सा ढह गया और वहां मौजूद लोग मलबे में फंस गए। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया।  रेस्क्यू टीमों ने कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।

अस्पतालों में भी पहुंचाए गए घायल

हादसे के बाद कुल 10 मरीजों को एम्स के जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया। इनमें चार लोगों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल एक मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

अस्पताल में भर्ती अन्य घायलों का उपचार किया गया। एक मरीज की गंभीर अंग संबंधी चोट के लिए सर्जरी की गई, जबकि मामूली चोट वाले एक मरीज को निगरानी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं सफदरजंग अस्पताल में भर्ती 19 वर्षीय युवक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

 

पहले ही खतरनाक घोषित हो चुकी थी इमारत

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। सामने आए MCD के आदेश के अनुसार, सत्य निकेतन स्थित भवन संख्या-13 को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था।

निगम ने संपत्ति के मालिक या कब्जाधारी को भवन को तीन दिनों के भीतर ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। आदेश में भवन की स्थिति को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा गया था कि इससे वहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास से गुजरने वाले लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है।

MCD ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की संबंधित धाराओं के तहत भवन को गिराने का आदेश दिया था। आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि तय समय में मालिक स्वयं भवन को ध्वस्त नहीं करता है तो निगम की ओर से कार्रवाई की जाएगी और ध्वस्तीकरण का खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।

अब हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद इमारत में लोग कैसे रह रहे थे और वहां मरम्मत का काम किसकी अनुमति से किया जा रहा था।

मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली और स्थिति का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति इस हादसे के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई होगी।

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