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स्थानीय भाषा को भी जानें बैंक शाखाओं के कर्मचारी: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, बैंक प्रबंधन को यह करना होगा सुनिश्चित

मुंबई: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से आग्रह किया कि वे ग्राहकों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए शाखा कर्मचारियों के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों से जुड़ाव कम होने से क्रेडिट सूचना कंपनियों पर निर्भरता बढ़ गई है। ये कंपनियां आंकड़े अद्यतन करने में लंबा समय लेती है, जिसके कारण ग्राहकों को कर्ज देने से मना कर दिया जाता है।

स्थानीय भाषा न बोलने पर बैंक अधिकारियों के राजनीतिक दलों के गुस्से का सामना करने की कई घटनाओं के बाद उन्होंने यह बात कही है। मंत्री ने नियुक्ति और मानव संसाधन नीतियों में बदलाव की भी वकालत की ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि स्थानीय भाषा बोलने वाले लोगों की भर्ती की जाए और उनका बेहतर मूल्यांकन भी हो।

सीतारमण ने एसबीआई के एक कार्यक्रम में कहा, ‘यह सुनिश्चित करने के लिए भर्ती करें कि शाखा में तैनात प्रत्येक कर्मचारी अपने ग्राहक को समझे और स्थानीय भाषा बोले। कम से कम, अगर शीर्ष प्रबंधन नहीं बोलता है, तो शाखा स्तर के अधिकारी को बोलना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘मै स्थानीय भाषा में उनकी दक्षता के आधार पर उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने पर जोर दूंगी।’

सीतारमण ने कहा कि जिस ‘एकमात्र आलोचना’ का वह बचाव नहीं कर सकतीं, वह है विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न मातृभाषाओं के लोगों को नियुक्त न करने की नीति। उन्होंने यह याद दिलाया कि किसी बैंक के लिए अपना व्यवसाय चलाने के लिए स्थानीय ग्राहक आवश्यक है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘ग्राहकों के साथ जुड़ाव होना बैंकों के लिए वृद्धि के दृष्टिकोण से भी आवश्यक है और याद दिलाया कि कैसे पुराने निजी क्षेत्र के बैंकों ने राष्ट्रीयकरण से पहले इस तरह का जुड़ाव स्थापित किया था।’

सीतारमण ने कहा कि बेहतर तकनीक को व्यक्तिगत स्पर्श के साथ मिलाना अतीत की एक विशेषता रही है। सीतारमण ने कहा कि व्यक्तिगत संपर्क की कमी के कारण ऐसी स्थितियां भी पैदा हुई है जहां बैंक शाखा स्थानीय ग्राहक को नहीं जानती।

उन्होंने कहा कि पहले, एक बैंक अधिकारी जानता था कि कौन कर्ज लेने योग्य है और कौन विश्वसनीय है, जो अब नहीं है। इसके बजाय, बैंक बाहरी क्रेडिट सूचना कंपनियों पर निर्भर रहते है, जो अपने रिकॉर्ड अद्यतन करने में लंबा समय लेती है, जिसके कारण ऋण देने से मना भी कर दिया जाता है।

 

बैंक संघों ने निजीकरण पर सीतारमण आलोचना की की टिप्पणी की

नई दिल्ली: बैक संघों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण संबंधी टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा है कि वित्तीय समावेश अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें (बैंकों को) पूंजीगत समर्थन के साथ मजबूत किए जाने की जरूरत है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के योगदान का उल्लेख करते हुए सभी बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नौ श्रम संघों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत १० प्रतिशत खाते पीएसबी द्वारा खोले गए। बयान में कहा गया कि प्राथमिकता वाले ऋण एवं सामाजिक बैंकिंग लगभग पूरी तरह और दातर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा संचालित है। है। इसमें कह कहा गया, ‘अगर आज भारतीय बैंकिंग मजबूत है, तो यह सार्वजनिक स्वामित्व में निर्मित जुझारू क्षमता की वजह से हैज दुनिया का कोई भी देश, बैंकों के निजीकरण के जरिये सार्वभौमिक बैंकिंग हासिल नहीं कर पाया है। यह कहना कि निजीकरण से समावेश वेश सुनिश्चित होगा इसका कोई भी प्रमाण नहीं है।’ इस सप्ताह की शुरुआत में, वित्त मंत्री ने कहा था कि सरकारी बैंकों के निजीकरण से से वित्तीय समावेशन और राष्ट्रीय हित को कोई नुकसान नहीं

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